रविवारीय- रज़ाई बनाम ज़िम्मेदारी, ठंडी सुबहों में दफ़्तर जाने की जंग

️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा उफ़्फ़ ये ठंडी और दफ़्तर! रात…

विश्वविद्यालय, सत्ता और साहित्य की अपमानित गरिमा

डॉ. प्रियंका सौरभ गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज…

स्वामी विवेकानंद का ‘विश्वगुरु भारत’ : खंडित विश्व के लिए वेदांत की प्रासंगिकता

(जहाँ से विश्व को दिशा मिले : विवेकानंद और विश्वगुरु भारत की संकल्पना) डॉ. सत्यवान सौरभ इक्कीसवीं सदी का विश्व…

वेनेजुएला संकट के बहाने वैश्विक शक्ति-संतुलन

डॉ. सत्यवान सौरभ हाल ही में वेनेजुएला में घटित राजनीतिक घटनाक्रम और उसमें अमेरिकी हस्तक्षेप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक…

युवा एमपी-एमएलए, जो भारतीय युवाओं के लिए बने राजनीतिक प्रेरणा: डॉ. अतुल मलिकराम

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसके निरंतर नवीन बने रहने की क्षमता में है। हर चुनाव के साथ नई…