रविवारीय- प्रेमचंद सिर्फ महान लेखक नहीं, अपने समय से आगे सोचने वाले विराट व्यक्तित्व थे

अभी दो दिन पहले ही हमने महान कथाकार, उपन्यास सम्राट की 146 वी जयंती मनाई है । आप चाहें उनके…

कॉकरोच आंदोलन: गांधीवाद की छाया या डिजिटल युग का नया प्रतिरोध?

– डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में जब भी कोई नया जन-आंदोलन उभरता है, उसे पुराने वैचारिक फ्रेमों में समझने की…

रविवारीय- बाबुओं का ‘माल रोड’, लंच ब्रेक की चहलकदमी, सुकून और दफ़्तर की अनकही दुनिया

चलिए आज आपको हम बाबूओं के ‘ माल रोड ‘ का दर्शन कराते हैं । क्यों ? चौंक गए न…

नीट के बवाल के बीच एक बड़ा सवाल: डॉक्टर बनने की राह में संवेदनाएँ कहाँ खो जाती हैं?

– डॉ. सत्यवान सौरभ देश में जब भी नीट (NEET) परीक्षा होती है, उसके बाद केवल परिणामों की नहीं, बल्कि…

डिजिटल पत्रकारिता में बढ़े जवाबदेही के मानक, मान्यता प्राप्त सेल्फ रेगुलेटरी बॉडी (SRB) से संबद्धता बने अनिवार्य

पूर्णेन्दु पुष्पेश, महासचिव, वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, झारखंड लोकतंत्र का चौथा स्तंभ केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज…

रविवारीय- वैभव और विवशता के बीच का द्वंद्व

किसी काम से दिल्ली आना हुआ। काम क्या था—एक पारिवारिक समारोह में शामिल होना था। नौकरीपेशा लोगों के लिए कार्यालयी…