‘फ़्लैशबैक’ में अतीत की स्मृतियों से वर्तमान तक की साहित्यिक यात्रा

पुस्तक समीक्षा – अभिषेक सिंह मनीष वर्मा ‘मनु’ की ‘फ़्लैशबैक’ महज़ एक पुस्तक नहीं है; यह अतीत की एक ऐसी…

शैक्षणिक पत्रिका क्या होती है और क्या नहीं ? जानिए विस्तार से

संकलनकर्ता- श्री प्रमोद कुमार, शिक्षाविद। प्रस्तावना: शैक्षणिक पत्रिका (जिसे विद्वत् पत्रिका, सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका या रेफ़री पत्रिका भी कहते हैं) एक…

रविवारीय- काम और ज़िंदगी के बीच संतुलन, आख़िर हम 24×7 अलर्ट मोड पर क्यों हैं ?

संतुलन साधने की क़वायद घुमक्कड़ हूँ मैं। घुमक्कड़ी मेरा शौक है। हाँ! घुमक्कड़ प्रजाति का फ़िलहाल नहीं हूँ, पर भविष्य…

रविवारीय- मैं शून्य हूँ, सोशल मीडिया की भीड़ में अपनी पहचान तलाशता एक ‘शून्य’

मैं शून्य हूँ !!!! चलिए, आज आपको कुछ वैसी बातें बताते हैं, जिन्हें आप और हम सभी जानते हैं; पर…

रविवारीय- हिंदी दिवस से आगे बढ़े हिंदी का सफर, औपचारिकता नहीं व्यवहार की भाषा बने हिंदी

हिंदी दिवस पर विशेष हिंदी दिवस का आग़ाज़ हो गया है और हम सभी इस सालाना पर्व को मनाने के…

रविवारीय- बैरंग पत्र और तार- पुरानी चिट्ठियों में छुपी यादों का संसार

बैरंग पत्र पुरानी यादें भी कहाँ पीछा छोड़ती हैं।न चाहते हुए भी गाहे – बगाहे आपके सामने आकर खड़ी हो…