रविवारीय- आज जाने की ज़िद न करो, जब भागदौड़ भरी ज़िंदगी सुकून और ‘मूड वाली छुट्टी’ माँगने लगे

“आज जाने की ज़िद ना करो । यूँ ही पहलू में बैठे रहो ॥” फ़ैयाज़ हाशमी द्वारा लिखी गई एक…

रविवारीय- जब व्हाट्सएप हमारा ज़रिया नहीं, हमारी दुनिया बन गया

व्हाट्सएप की दुनिया बात थोड़ी पुरानी ज़रूर है, पर उतनी भी पुरानी नहीं कि उसे हम बता न सकें ।…

रविवारीय- प्रेमचंद सिर्फ महान लेखक नहीं, अपने समय से आगे सोचने वाले विराट व्यक्तित्व थे

अभी दो दिन पहले ही हमने महान कथाकार, उपन्यास सम्राट की 146 वी जयंती मनाई है । आप चाहें उनके…

कॉकरोच आंदोलन: गांधीवाद की छाया या डिजिटल युग का नया प्रतिरोध?

– डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में जब भी कोई नया जन-आंदोलन उभरता है, उसे पुराने वैचारिक फ्रेमों में समझने की…