रविवारीय- जब ‘गुंडा’ था सम्मान, संरक्षण और वच, का प्रतीक, आज बन गया डर और अराजकता का पर्याय

वो एक गुंडा ही तो था , जिसने गुंडा शब्द को इज़्ज़त दिलाई । गुंडा एक किरदार बन पाया ।…

कोकरोच पार्टी, टूलकिट और जेन-जी को भड़काने का षड्यंत्र — परदे के पीछे कौन?

डॉ. प्रियंका सौरभ आज का युग सूचना और संचार का युग है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने विचारों…

कब तक सरपंचों, पार्षदों के हक का उपयोग करते रहेंगे पति?

 डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में लोकतंत्र की जड़ें केवल संसद, विधानसभा और बड़े राजनीतिक मंचों में नहीं, बल्कि गांवों, कस्बों…