संकीर्ण जीवन-दृष्टि और टूटती नैतिक रीढ़
“जब जीवन का अर्थ सिर्फ संपत्ति रह जाए” “अच्छे जीवन की भूलभुलैया: क्या खोया, क्या पाया?” आधुनिक समाज में “अच्छे…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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“जब जीवन का अर्थ सिर्फ संपत्ति रह जाए” “अच्छे जीवन की भूलभुलैया: क्या खोया, क्या पाया?” आधुनिक समाज में “अच्छे…
“औरत का चरित्र और मर्द का भाग्य…” – एक सामाजिक विमर्श “त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम; देवो न जानाति कुतो मनुष्यः”…
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, परंतु निजी अस्पतालों द्वारा इसे लूट का…
“टेकऑफ से पहले अंत: 242 ज़िंदगियाँ और एक सवालों से भरा आसमान” “ड्रीमलाइनर या डेथलाइनर?: जब उड़ान ही आख़िरी सफर…
रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को…
कुछ औरतें मायके के बिना जीना सीख जाती हैं — न माँ की गोद, न भाई का कंधा, फिर भी…