रविवारीय- “चरित्र बनाम भाग्य: कहावत के पीछे का सच और समाज की सच्चाई”

“औरत का चरित्र और मर्द का भाग्य…” – एक सामाजिक विमर्श “त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम; देवो न जानाति कुतो मनुष्यः”…

आयुष्मान भारत या असहाय भारत: निजी अस्पतालों में योजना की लूट और लाचारी

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, परंतु निजी अस्पतालों द्वारा इसे लूट का…

 हादसे की ऊँचाई से गिरते सवाल: अहमदाबाद की एक दोपहर

“टेकऑफ से पहले अंत: 242 ज़िंदगियाँ और एक सवालों से भरा आसमान” “ड्रीमलाइनर या डेथलाइनर?: जब उड़ान ही आख़िरी सफर…

रिश्तों का एटीएम: जब प्यार केवल ट्रांज़ैक्शन बन जाए

रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को…