पत्रकारिता की गिरती गरिमा और राजनीति की बिगड़ती भाषा

डॉ. प्रियंका सौरभ लोकतंत्र केवल वोट देने का अधिकार नहीं होता, वह एक सतत संवाद की प्रक्रिया है—जहाँ सवाल पूछे…

रविवारीय- अपार्टमेंट की लिफ्ट में बंटी दुनिया, बराबरी अब भी ग्राउंड फ्लोर पर अटकी

बराबरी ग्राउंड फ्लोर पर ही रह गई अपार्टमेंट में अमुमन दो लिफ्ट हुआ करता है । अगर अपार्टमेंट थोड़ा ज़्यादा…

झोपड़ी पर बुलडोज़र, लेकिन मॉल पर खामोशी क्यों?

सड़क पर ठेला हटता है, लेकिन शोरूम का सामान क्यों नहीं?कार्रवाई वहीं तेज़, जहाँ विरोध की आवाज़ कमजोर हो। फुटपाथ…

रविवारीय- सर्वदेव मंदिर के बहाने आस्था, नियति और समाज की सच्चाई का आईना

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा सर्वदेव मंदिर के बहाने मेरे घर…

उज्ज्वला का उजाला या आपूर्ति का अंधेरा?

डॉ. प्रियंका सौरभ हालिया एलपीजी संकट ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी महत्वाकांक्षी कल्याणकारी पहलों की चमक धूमिल कर दी है।…

रविवारीय – वैश्विक संकट पर ‘आम आदमी’ की नजर, दाल-रोटी के बीच सीमित सोच का दायरा

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा वैश्विक संकट और आम आदमी एक…