सम्मान, सम्मेलन और कविता का खोता जन-सरोकार
जब कविता मंचों में सिमट जाए, जन-सरोकार पीछे छूट जाएँ और आत्ममुग्धता के बंद वृत्त में कवियों का लोकतंत्र तमगों…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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जब कविता मंचों में सिमट जाए, जन-सरोकार पीछे छूट जाएँ और आत्ममुग्धता के बंद वृत्त में कवियों का लोकतंत्र तमगों…
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हर वर्ष 29 जनवरी भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्मृति के रूप में उपस्थित होता है। सामान्य जन…
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