साइनसिने फ़िल्म फेस्टिवल के द्वितीय सत्र 2021 की आधिकारिक प्रविष्ठि हुई बंद

साइनसिने फ़िल्म फेस्टिवल के द्वितीय सत्र 2021 की आधिकारिक प्रविष्ठि 5 जनवरी 2022 को बंद हो गई इसकी आधिकारिक घोषणा साइनसिने फ़िल्म फेस्टिवल के सोशल मीडिया एकाउंट्स से की गई । शिवाय प्रोडक्शन्स के बैनर तले हो रहे इस फेस्टिवल में इस कोरोना काल मे भी प्रथम सत्र की तरह द्वितीय सत्र में दुनियाँ भर के निर्माता-निर्देशकों ने दिलचस्पी दिखाई। और इस वैश्विक महामारी के बीच फेस्टिवल के द्वितीय सत्र में 186 फिल्मों की आधिकारिक प्रविष्ठि हुई, जिनमें 32 देशों की फिल्में शामिल है। शिवाय प्रोडक्शन्स के बैनर तले हो रहे इस फेस्टिवल के प्रथम सत्र में भी दुनियाँ के लगभग 25 देशों से 200 से अधिक फिल्मों की आधिकारिक प्रविष्ठि हुई थी। आंकड़े के मुताबिक इस बार फिल्मों की संख्या कम जरूर हुई है, लेकिन फेस्टिवल का दायरा बढ़ा है जहाँ प्रथम सत्र में 25 देशों से फिल्में आई थी वहीं दूसरे सत्र में 32 देशों से फिल्मों को आधिकारिक प्रविष्ठि हुई है।

साइनसिने फ़िल्म फेस्टिवल के प्रथम सत्र का आयोजन बिहार की आर्थिक राजधानी मुजफ्फरपुर में हुआ था। जिसमे भारतीय सिनेमा की कई जानी मानी हस्तियों ने शिरकत किया था और दुनियाँ के कई देशों से निर्माता निर्देशक फेस्टिवल का हिस्सा बनें थे। साइनसिने फ़िल्म फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य है बिहार में फ़िल्मउद्योग को बढ़ावा देना ताकी बिहार के कलाकारों को काम के लिए दूसरे राज्यों के फ़िल्मउद्योग पर आश्रित नहीं रहना पड़े। और जो निचले स्तर पर अच्छे कलाकार दबे हुए हैं, उन्हें पूरा आकाश मिल सके ताकी कला के क्षेत्र में भी बिहार की अग्रणी भूमिका बन सके। इतना ही नहीं साइनसिने फ़िल्म फेस्टिवल बिहार की कला एवं संस्कृति के साथ बिहार पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। जिससे बिहार के विषय में जो भ्रांतियाँ है वो दूर हो सके और बिहार की कला संस्कृति पूरी दुनियाँ में फैले। साइनसिने फ़िल्म फेस्टिवल के प्रथम सत्र में बिहार की कला संस्कृति से जुड़ी अनेक कार्यक्रम की झलक फेस्टिवल में देखने को मिली थी। अब देखना ये है कि आयोजक इस द्वितीय सत्र में फेस्टिवल का अवार्ड वितरण समारोह किस धूमधाम से करा पाता है। क्योंकि कोरोना के तीसरे लहर की वजह से सरकार के तरफ से ज्यादा रियायत की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है। ऐसे में देखना ये है कि साइनसिने फ़िल्म फेस्टिवल के द्वितीय सत्र का आयोजन मुजफ्फपुर में ही होता है या कहीं और बिहार के किसी दूसरे शहर में और इस कोरोना महामारी के बीच शांतिपूर्ण ढंग से फेस्टिवल करा लेना आयोजकों के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी ।

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