व्यक्ति विशेष:नीलोत्पल मृणाल सक्षम भारत परियोजना के माध्यम से सशक्तिकरण और न्याय के पक्षधर

 नीलोत्पल मृणाल एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं — महाराष्ट्र बीजेपी उत्तर भारतीय मोर्चा के उपाध्यक्ष, सफल उद्यमी, लेखक, सामाजिक प्रभावशाली व्यक्ति और न्याय तथा दिव्यांग अधिकारों के प्रखर समर्थक। बचपन में पोलियो से प्रभावित होकर शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद, मृणाल जी का जीवन संघर्ष, दृढ़ संकल्प और समाज सेवा का अद्भुत उदाहरण है।

उनकी सबसे प्रभावशाली पहलों में से एक है प्रोजेक्ट सक्षम भारत ,जो दिव्यांगजनों को कौशल विकास, उद्यमिता, डिजिटल समावेशन और सामाजिक गरिमा के माध्यम से सशक्त बनाने की एक राष्ट्रव्यापी मुहिम है।

प्रारंभिक जीवन और विपरीत परिस्थितियों पर विजय

पटना, बिहार में जन्मे नीलोत्पल मृणाल का बचपन शारीरिक चुनौतियों के साथ गुज़रा। लेकिन उन्होंने कभी भी पोलियो को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरणा बनाया। उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और फिर मुंबई से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विपणन में एमबीए किया। उन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल की।

समाज की रूढ़ियों और संरचनात्मक असमानताओं से उनके प्रारंभिक टकराव ने उन्हें उन लोगों की आवाज़ बनने के लिए प्रेरित किया, जिन्हें अक्सर नीति निर्माण और सामाजिक विकास में अनदेखा किया जाता है — विशेषकर दिव्यांगज

राजनीतिक नेतृत्व: प्रवासी और वंचित वर्गों की आवाज़

महाराष्ट्र बीजेपी उत्तर भारतीय मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में मृणाल उत्तर भारतीय प्रवासियों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके नेतृत्व में मोर्चा ने कई सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं — विशेष रूप से जनवरी 2024 में मुंबई में आयोजित भव्य राम जन्मोत्सव रैली — जो राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गर्व और जनचेतना को बढ़ावा देती है।

उन्होंने प्रवासी मज़दूरों, छोटे उद्यमियों और दिव्यांगजनों से जुड़ी समस्याओं को राजनीतिक मंच पर प्रमुखता से उठाया है और समावेशी कल्याण योजनाओं की मांग की है।

प्रोजेक्ट सक्षम भारत: गरिमा के साथ सशक्तिकरण

श्री मृणाल के नेतृत्व में शुरू की गई ‘प्रोजेक्ट सक्षम भारत’ एक परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस परियोजना के अंतर्गत:

* डिजिटल मार्केटिंग, सिलाई, कंप्यूटर साक्षरता और हस्तशिल्प में कौशल विकास कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं।
* दिव्यांग उद्यमियों को माइक्रोफाइनेंस और स्टार्टअप सहायता प्रदान की जाती है।
ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म दिव्यांगों की पहुँच को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं।
मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और सहयोग प्रदान किया जाता है।
* सार्वजनिक अवसंरचना को समावेशी और सुलभ बनाने हेतु नीति सुधार की वकालत की जाती है।

यह परियोजना महाराष्ट्र और झारखंड सहित कई राज्यों में सक्रिय है। श्री मृणाल का अपना जीवन इस अभियान को प्रामाणिकता और प्रेरणा प्रदान करता है, यह दर्शाते हुए कि विकलांगता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल की शक्ति है।

उद्यमिता: दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक संभावनाओं का सृजन

नीलोत्पल मृणाल एक सफल उद्यमी भी हैं। उनके दो ब्यूटी और वेलनेस ब्रांड्स का वार्षिक टर्नओवर ५० करोड़ से अधिक है। एक छोटे शहर से शुरू होकर इतने बड़े कारोबारी बनने की उनकी यात्रा, शारीरिक अक्षमता से जुड़ी सामाजिक धारणाओं को तोड़ती है।

उनकी कंपनियाँ दिव्यांगजनों को नौकरी देने को प्राथमिकता देती हैं, जो उनके समावेशी रोजगार के दृष्टिकोण को दर्शाता है। साथ ही वे अपने व्यवसाय के मुनाफे का उपयोग सामाजिक अभियानों को समर्थन देने में करते हैं — जैसे दिव्यांग विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और युवाओं को आजीविका सहायता।

सुशांत सिंह राजपूत को न्याय: एक नागरिक आंदोलन

श्री मृणाल तब राष्ट्रीय चर्चा में आए जब उन्होंने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मृत्यु के बाद न्याय की मांग को लेकर देशव्यापी अभियान शुरू किया। उन्होंने “Justice for SSR” नामक मुहिम चलाई जिसमें ऑनलाइन याचिकाएँ, विरोध प्रदर्शन और सुशांत की स्मृति में वृक्षारोपण अभियान भी शामिल थे।

इस अभियान ने मानसिक स्वास्थ्य, भाई-भतीजावाद और पुलिस जवाबदेही जैसे मुद्दों पर जनचेतना को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया।

जनसेवा और धरातल पर कार्य

डिजिटल और सार्वजनिक मंचों पर नेतृत्व के साथ-साथ श्री मृणाल जमीनी स्तर पर भी सक्रिय हैं। सुशांत सिंह राजपूत की एक इच्छा को पूरा करते हुए उन्होंने दो दृष्टिहीन बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी ली।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्लम बस्तियों और दिव्यांगजनों के लिए खाद्य वितरण, स्वास्थ्य जांच शिविर और शैक्षणिक कार्यक्रम भी चलाए हैं।

 नीलोत्पल मृणाल एक ऐसे दुर्लभ व्यक्तित्व हैं जो बुद्धिमत्ता, सामाजिक सक्रियता, नेतृत्व और संवेदनशीलता का अनोखा संगम हैं।

‘प्रोजेक्ट सक्षम भारत’ से लेकर ‘Justice for SSR’ आंदोलन तक, उनका हर प्रयास भारत को एक अधिक समावेशी, न्यायप्रिय और संवेदनशील राष्ट्र बनाने की दिशा में है। वे केवल परिवर्तन की बात नहीं करते — वे स्वयं एक परिवर्तन हैं।

उनकी कहानी लाखों लोगों को यह विश्वास दिलाती है कि सच्चा नेतृत्व सीमाओं से नहीं, बल्कि उन्हें पार करने के साहस से परिभाषित होता है।

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