गाय महज जानवर नहीं, एक आस्था है।

गो हत्या देश में हमेशा से ही एक संवेनदशील मुद्दा रहा है और इस पर राजनीति होती रही है। मगर जिस समाज में गाय को पूजा जाता है, उसके वध पर अंकुश नहीं,  और वहां  इसके लिए कोई कानून नहीं हो तो वह कैसा समाज ?  हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार गाय को गौ माता भी कहा जाता है। गौ माता के पूजन के बारे में वेदशास्त्रों, धर्मग्रंथों में क्या कहा गया है। इसलिए अगर किसी के हाथों गाय की हत्या हो जाती है तो यह घोर पाप माना जाता है। कुछ तो गो वध को देश भर में प्रतिबंधित करने का आग्रह भी कर चुके हैं. सन् 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना पड़ा, “मुझे पता है कुछ लोग जो रात में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं, वे सुबह उठ कर गो रक्षक का चोला ओढ़ लेते हैं.” मॉब लिंचिंग और गो रक्षा के नाम पर होने वाली  हिंसा को देख कर कई बार मांग उठी  कि गो वध के विरुद्ध सख़्त क़ानून बना दिया जाए. कुछ तो गो वध को देश भर में प्रतिबंधित करने का आग्रह भी कर चुके हैं. गो वध के बाबत इस समय विभिन्न क़ानून हैं. देश के 28 में से 20 राज्यों में गो वध पर रोक है, लेकिन बंगाल, केरल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा में बीफ कानूनी तौर पर सब जगह मिलता है. उच्चतम न्यायालय ने गो वध मामले में अक्सर इसके आर्थिक पहलू को नज़र में रखा है,…

‘गंगाजल’ विविध विषाणुओं के प्रादुर्भाव से मुक्ति देता है, तथा प्रतिकारक शक्ति बढाने में उपयुक्त सिद्ध होता है ! – अधिवक्ता अरुणकुमार गुप्‘गंगाजल’ विविध विषाणुओं के प्रादुर्भाव से मुक्ति देता है, तथा प्रतिकारक शक्ति बढाने में उपयुक्त सिद्ध होता है ! – अधिवक्ता अरुणकुमार गुप्ता

किस नदी में किस समय स्नान करने से उसका लाभ होता है, इसका संपूर्ण ज्ञान भारतीय ऋषी–मुनियों को था । इसलिए…

सर्वे – 43% लोगों ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस के लिए उनके पास कम्प्यूटर, टेबलेट, प्रिंटर, राउटर जैसी चीज़ें है ही नहीं

दुनिया भर में लॉकडाउन के चलते सभी स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है। भारत के स्कूलों में मार्च…

अगर आप नॉन वेज के शौक़ीन हैं तो आज बनाना सीखिए मटन, स्वादिष्ट और लजीज मटन बनाना बता रहीं हैं सोनाली

बिहार पत्रिका- नॉन वेज खाने वालों अगर टेस्टी मटन खाने को मिल जाये तो क्या मजा आ जाता है। बिहारी…

बाल श्रम से कैसे बच पायेगा भविष्य, बालश्रम निषेध दिवस – विशेष

संयुक्त राष्ट्र बाल श्रम को ऐसे  काम के रूप में परिभाषित करता है, जो बच्चों को उनके बचपन, उनकी गरिमा और क्षमता से वंचित करता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।  बच्चों के स्कूली जीवन में हस्तक्षेप करता है।  बाल श्रम आज  दुनिया में एक खतरे के रूप में मौजूद है। आज के बच्चे कल के भविष्य हैं। देश की प्रगति और विकास उन पर निर्भर है। लेकिन बाल श्रम उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर चोट…