एचआरयूएफ का 7 वां वर्षगांठ संपन्न
दुनिया के पावरफुल मानवाधिकार संस्थाओं में से एक ह्युमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन- एचआरयूएफ ग्रासरूट लेवल पर मानवाधिकार को प्रमोट करने के लिये “एचआरयूएफ आईज” शुरू करेगा।इसके द्वारा लोगों को उनके मानवाधिकार और मानव कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया जायेगा। एचआरयूएफ के सातवें वर्षगांठ पर मशहूर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं एचआरयूएफ चेयरमैन विशाल रंजन दफ्तुआर ने इसकी घोषणा की।
गौरतलब है कि तत्कालीन राष्ट्रपति माननीय रामनाथ कोविंद की प्रेरणा से वर्ष 2019 में वैश्विक स्तर की संस्था ह्युमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन- एचआरयूएफ की स्थापना की गई। अब तक लगातार सात ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय मिशनों को पूरा करके एचआरयूएफ ने जबरदस्त शुरुआत की है।
एचआरयूएफ दुनिया का इकलौता औरगेनाईजेशन है जो मानवाधिकार के साथ-साथ मानव कर्तव्यों को भी प्रमोट करता है।भारत विरोधी मानवाधिकार संस्थाओं विशेषकर इंग्लैंड की एमनेस्टी इंटरनेशनल और अमेरिका की ह्युमन राइट्स वाच की साजिशों और कुचक्रों को कुचलना भी एचआरयूएफ का एक बड़ा लक्ष्य है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर भी एचआरयूएफ ने पहल की है।
आम जनता के मानवाधिकारों के संरक्षण के साथ-साथ भारतीय सेना,अर्धसैनिक बलों और विभिन्न राज्य पुलिस बलों के मनोबल को ऊंचा रखना भी एचआरयूएफ का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है जिन्हें कई मर्तबा मानवाधिकार हनन के झूठे आरोपों के द्वारा हतोत्साहित किया जाता रहा है।
अभी हाल में पटना के चर्चित कोचिंग प्रकरण में भी एचआरयूएफ ने पहल की है जिसके पश्चात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने त्वरित कारवाई करते हुये पटना के एसएसपी से दो सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। आरा के बहुचर्चित एनकाउंटर मामले में भी ह्युमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन- एचआरयूएफ ने हस्तक्षेप किया है।
एचआरयूएफ के सात सफल अंतर्राष्ट्रीय मिशन:
1) वर्ष 2019 के 12 सितम्बर को बांग्लादेश की जेल में 11 साल से कैद दरभंगा के सतीश चौधरी की 1 महीने में वतन वापसी
2)
वर्ष 2019 के दिसम्बर माह में बांग्लादेश की जेल से उत्तर प्रदेश के बलिया के अनिल कुमार सिंह की रिहाई।
3) वर्ष 2020 में कोरोना के वक्त बांग्लादेश की महिला सवेरा बेगम की वतन वापसी। बांग्लादेश की सरकार ने कार्डिनेशन की सारी जिम्मेदारी लिखित रूप से एचआरयूएफ चेयरमैन को दी थी।यह अभूतपूर्व अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि थी।
4) वर्ष 2021 में कोरोना के डेल्टा वेरिंयट के वक्त भागलपुर के उस्तु गाँव के अनुसूचित जाति के भूमिहीन राजेन्द्र रविदास की बांग्लादेश की जेल से त्वरित रिहाई।
5)वर्ष 2023 में म्यांमार के 2 नागरिकों की वतन वापसी।
6) वर्ष 2023 बांग्लादेश के एक नागरिक की वतन वापसी।
7) वर्ष 2024 में इथोपिया से उत्तर प्रदेश, बिहार और हिमाचल प्रदेश के 21 लोगों की त्वरित वतन वापसी।
