पुरस्कारों का सौदा: साहित्य के बाज़ार में बिकती संवेदनाएं
साहित्य आज साधना नहीं, सौदेबाज़ी का बाज़ार बनता जा रहा है। नकली संस्थाएं ₹1000-₹2500 लेकर ‘राष्ट्रीय’ और ‘अंतरराष्ट्रीय’ पुरस्कार बांट…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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साहित्य आज साधना नहीं, सौदेबाज़ी का बाज़ार बनता जा रहा है। नकली संस्थाएं ₹1000-₹2500 लेकर ‘राष्ट्रीय’ और ‘अंतरराष्ट्रीय’ पुरस्कार बांट…
विजय की कीमत: भीड़, भगदड़ और एक गंभीर सवाल भारतीय प्रीमियर लीग (आई.पी.एल.) का इतिहास रोमांच, प्रतिस्पर्धा और जुनून से…
बेचारा… पौधा एक, फोटो में पच्चीस लोग। किसी ने पकड़ा गमला, तो किसी ने थामी टहनी, किसी ने मुस्कान ओढ़ी,…
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