29 जनवरी : भारतीय पत्रकारिता की चेतना का दिवस

हर वर्ष 29 जनवरी भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्मृति के रूप में उपस्थित होता है। सामान्य जन…

आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का स्वैच्छिक योगदान

डॉ. प्रियंका सौरभ भारत के ग्रामीण समाज में महिला सशक्तिकरण, पोषण और स्वास्थ्य काफी हद तक आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं…

सर्द लखनऊ की रात और एक रिक्शेवाले की अधूरी ज़िंदगी की कहानी

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा रिक्शावाला वो लखनऊ की एक सर्द…

भारत सचमुच अपने फैसले स्वयं ले रहा

किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए रणनीतिक स्वायत्तता केवल विदेश नीति की तकनीकी भाषा नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न है।…

रविवारीय- एक फ़ोन कॉल, लाखों का नुकसान, ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी के पीछे छिपा भय, तकनीक और बैंकिंग लीकेज का खेल

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा डिजिटल अरेस्ट आज शायद ही कोई…

ऋतु परिवर्तन का लोकउत्सव: लोहड़ी और नई ऋतु की दस्तक

डॉ. प्रियंका सौरभ भारत की लोकपरंपराएँ केवल पर्व-त्योहार नहीं होतीं, वे समाज की सामूहिक स्मृति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन की जीवित…