आतंक पर निर्णायक सख़्ती ज़रूरी

सुरक्षा, कानून और नागरिक चेतना—तीनों मोर्चों पर एक साथ बड़े बदलाव की आवश्यकता भारत को आतंकवाद से निर्णायक रूप से…

“गाँव से ग्लोबल तक”: डॉ. सत्यवान सौरभ की कलम की उड़ान

(संघर्ष, साहित्य और संवेदना, हरियाणा की माटी से निकला साहित्य का सितारा, शब्दों से समाज तक, युवा साहित्य का उगता…

लोकतंत्र की रीढ़ या बाज़ार का शोर? प्रेस की स्वतंत्रता की परीक्षा

राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस (16 नवंबर) प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। जब पत्रकार निर्भय होते हैं,…

रविवारीय- बिहार ने दिखाया लोकतंत्र का असली स्वर, जनता ने अपने फैसले से लिखी नई कहानी

लोकतंत्र और बिहार इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार के लोगों ने अपनी रायशुमारी ज़ोरदार ढंग से जाहिर…