महिला सुरक्षा के लिए कितनी गंभीर है हमारी सरकार ?

( अनुभव की बात, अनुभव के साथ )

7 अक्टूबर 2018 दिन रविवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सरकार में आने के बाद उन्होंने आधी आबादी (महिलाओं) को पुरुषों के बराबर अधिकार मिले, इसके लिए पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों के प्रतिनिधित्व में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। मुख्यमंत्री ने पोशाक योजना और लड़कियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई साइकिल योजना का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने लड़कियों को आगे बढ़ाने और समाज में कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए अपनी ओर से किए गए प्रयासों का जिक्र कर अपनी उपलब्धि के लिए अपनी पीठ खुद थपथपाई। नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण, महिला थाना की शुरुआत, सहित महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए अपने कार्यों का उन्होंने बखान किया।खैर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने जो कहा वह सच कहा। इसमें कहीं कोई शक की गुंजाइश नहीं है। लेकिन परिणाम क्या सामने आया, इस पर भी गौर करना आवश्यक है। हालिया दिनों में पूरे प्रदेश में महिलाओं के साथ होने वाले यौन हिंसा में काफी वृद्धि नजर आ रही है। पांच दिन पूर्व पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में गंगा स्नान को गई एक महिला के साथ गंगा तट पर ही सामूहिक बलात्कार और उसके बाद उसका वीडियो बनाकर उसे शेयर करना आखिर किस मानसिकता को दर्शाता है। यह समझ से परे है। महिला उन वहसी दरिंदों से उसे छोड़ देने की गुहार लगाती रही, लेकिन अपराधियों के दिल में न तो दया आई और न ही प्रशासन से कोई डर भय नजर आया। यह कोई पहली घटना नहीं है। पटना, पूर्णिया सहित पूरे राज्य में प्रतिदिन इस प्रकार की घटना की सूचना मिल रही है। कल के अखबार में ही मसौढ़ी में एक पाँच वर्षीय बच्ची के साथ उसके पड़ोसी द्वारा तो आरा में एक शादीशुदा महिला से उसके मुंह बोले चाचा द्वारा दुष्कर्म की घटना का समाचार पढ़ने को मिला।ये वो घटनाएं हैं, जो मामले थानों में दर्ज हो पाते हैं। लेकिन यह भी हकीकत है कि ऐसे कई मामले होते हैं जो लोकलाज और भय से पुलिस तक नहीं पहुंच पाते। अभी हमने राज्य के विभिन्न आसरा गृहों, बालिका सुधार गृहों में रहने वाली बच्चियों के साथ यौन हिंसा की घटना को जाना। यह कब से चल रहा था और इसमें कौन-कौन शामिल हैं, इसकी जांच चल रही है। लेकिन जांच की जो वर्तमान तस्वीर सामने आई है उसमें बड़े-बड़े लोगों और समाज के जिम्मेदार लोगों के शामिल होने की संभावना दिख रही है। हमारी सरकार और मुख्यमंत्री का ध्यान इन घटनाओं की ओर नहीं जाता है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक बार भी प्रदेश में प्रतिदिन हो रही है इस प्रकार की घटना पर दुख नहीं जताया। यह कहना उचित नहीं है कि इन घटनाओं के लिए पूरी तरह सरकार दोषी है। लेकिन यह बात भी सत्य है की इन घटनाओं को देखकर ऐसा लग रहा है कि अपराध करने वालों में प्रशासन का डर समाप्त हो गया है। जिस सुशासन और रामराज्य के लिए नीतीश कुमार जाने जाते थे वह खत्म होता प्रतीत हो रहा है। प्रदेश में लड़कियों और महिलाओं के साथ हिंसा की घटना बढ़ती दिख रही है। ये घटनाएं निश्चित रूप से नीतीश कुमार के प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े करती है। सरकार को लड़कियों और महिलाओं के लिए कुछ करना ही था तो सबसे पहले ऐसा कुछ करती कि हम सबों की बहन बेटियां बगैर डर और भय के सड़कों पर निकल पातीं और वो सुरक्षित घर लौट पाएं। मां बाप को उनके बाहर निकलने पर किसी प्रकार की चिंता न रहे।

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