पटना। बिहार के पारंपरिक विश्वविद्यालयों और करीब 250 अंगीभूत महाविद्यालयों के हजारों शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने अपनी 15 सूत्री लंबित मांगों के समाधान के लिए चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। वेतन विसंगतियों के निराकरण, पदोन्नति, स्थायीकरण और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के क्रियान्वयन जैसी प्रमुख मांगों को लेकर कर्मचारियों में लंबे समय से असंतोष है। इसी को देखते हुए महासंघ ने संगठित रूप से बुधवार से दो दिवसीय आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। महासंघ की बैठक में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के अनुसार, कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए अब योजनाबद्ध तरीके से दबाव बनाया जाएगा। महासंघ के मुख्य संरक्षक गंगा प्रसाद झा, अध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह, महामंत्री वेंकटेश कुमार, रोहित कुमार और दीपक कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि वेतन कोषांग की मनमानी, सेवा शर्तों में विसंगतियां, लंबित पदोन्नति और स्थायीकरण जैसे मुद्दे वर्षों से लंबित हैं। कई बार सरकार से आग्रह और संवाद के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। निर्णय के तहत 6 और 7 मई को राज्यभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकेत्तर कर्मचारी कलमबंद हड़ताल पर रहेंगे और सामूहिक धरना देंगे। इसके बाद 20 मई को विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर कुलपतियों के समक्ष व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए जुलाई में बिहार विधानमंडल के समक्ष राज्यस्तरीय विशाल धरना आयोजित करने की योजना है, जिसमें सभी जिलों के कर्मचारी भाग लेंगे। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। महासंघ ने राज्य सरकार से जल्द पहल कर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। साथ ही सभी शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाएं, ताकि अपनी जायज मांगों को हासिल किया जा सके।
राज्यभर के विश्वविद्यालयों के हजारों शिक्षकेत्तर कर्मी 15 सूत्री मांगों को लेकर करेंगे आंदोलन
