उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने बिहार की संस्कृति से प्रेरित लोकगीत अभियान ‘गाड़ी गीत’ शुरू किया

पटना, 13 फरवरी, 2026: उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने आज ‘गाड़ी गीत’ नाम से एक विशेष स्थानीय अभियान की शुरुआत की, जो बिहार की संस्कृति से जुड़ा है। लोक संगीत हमेशा से लोगों की भावनाओं, आपसी जुड़ाव, रोज़मर्रा की खुशियों, मज़ाक और सामाजिक रिश्तों को पीढ़ी दर पीढ़ी जोड़ने का मजबूत जरिया रहा है।
पारंपरिक रूप से ‘गारी गीत’ अपनी चुटीली शैली और हल्के-फुल्के तंज भरे बोलों के लिए जाना जाता है। ‘गाड़ी गीत’ के लिए बैंक ने उसी पहचान वाली धुन और लय को बनाए रखा है, लेकिन उसके बोलों को सकारात्मक और जश्न के रंग में ढाला है। इस तरह स्थानीय संगीत की ताकत का इस्तेमाल करते हुए यह अभियान सपनों, तरक्की और रोज़मर्रा की गतिशीलता जैसे संदेशों को सरल और सम्मानजनक तरीके से लोगों तक पहुँचाता है।
‘गाड़ी गीत’ को पूरी तरह असली अंदाज़ में पेश करने के लिए उज्जीवन ने मशहूर क्षेत्रीय कलाकार रागिनी विश्वकर्मा के साथ सहयोग किया। उन्होंने इस गीत को तैयार किया और अपनी आवाज़ दी, जिसमें स्थानीय बोली, संगीत शैली और बिहार की सांस्कृतिक झलक साफ महसूस होती है। पारंपरिक धुन, लय और लोक रंग को बरकरार रखते हुए यह अभियान अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है और ग्राहकों से सीधा जुड़ाव बनाता है।

इस अभियान को डिजिटल और ज़मीनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया जाएगा। सोशल मीडिया, शाखाओं पर गतिविधियाँ, डीलर स्तर पर प्रचार और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए ग्राहकों तक इसे पहुँचाया जाएगा, ताकि लोग इसे अपने भरोसेमंद और परिचित माहौल में महसूस कर सकें। ‘गाड़ी गीत’ के साथ उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने बैंकिंग क्षेत्र में सांस्कृतिक जुड़ाव की एक नई शुरुआत की है। यह पहल बैंक के उस प्रयास को दिखाती है, जिसमें वह ग्राहकों के रोज़मर्रा के सपनों और जरूरतों से भावनात्मक रिश्ता बनाने की प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।
गाना देखने के लिए लिंक: https://youtu.be/TdHWjEZ6OII?si=gQwZy1kYkTkuYzbo
लॉन्च के बारे में बोलते हुए, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के वाहन वित्त प्रमुख प्रेमकुमार जी ने कहा, “गाड़ी गीत हमारे उस विचार को दर्शाता है कि बैंकिंग तभी असरदार बनती है, जब वह लोगों की संस्कृति और उनके जीवन के अनुभवों से जुड़ती है। लोक परंपरा और क्षेत्रीय कला को ग्राहकों की आकांक्षाओं और उनकी गतिशील जरूरतों से जोड़कर हम समुदाय के और करीब पहुँच पाते हैं।”

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