कोई पानी डाल दे तो मैं भी चौंच भर पीलूं: चुपचाप मरते परिंदों की पुकार
तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें…
“क्लासरूम से कॉर्पोरेट तक: उच्च शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी” “डिग्री से दक्षता तक: शिक्षा प्रणाली को उद्योग…
गांव की औरतें, जलवायु की मार: बीजिंग रिपोर्ट की चेतावनी “पानी, पेट और पहचान की लड़ाई: ग्रामीण महिलाओं पर जलवायु…
अख़बार के पन्नों की एक चौंकाने वाली सुर्ख़ी थी— “सीने में चीरा लगवाकर रखवाई गोली, बोली—मुझे मारा गया!” पहली बार…
भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकार आज निजी संस्थानों के लिए मुनाफे का जरिया बन चुके हैं। प्राइवेट…
आस्था पेशाब तक पिला देती है, जाति पानी तक नहीं पीने देती। कैसे लोग अंधभक्ति में बाबा की पेशाब को…