“बदलते मौसम, टूटती औरतें”,”सूखे खेत, खाली रसोई और थकी औरतें”

गांव की औरतें, जलवायु की मार: बीजिंग रिपोर्ट की चेतावनी “पानी, पेट और पहचान की लड़ाई: ग्रामीण महिलाओं पर जलवायु…

रविवारीय- “सीने में गोली, लेकिन वार नहीं—जब बदले की आग ने खुद को जला डाला!”

अख़बार के पन्नों की एक चौंकाने वाली सुर्ख़ी थी— “सीने में चीरा लगवाकर रखवाई गोली, बोली—मुझे मारा गया!” पहली बार…

प्राइवेट सिस्टम का खेल: आम आदमी की जेब पर हमला

भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकार आज निजी संस्थानों के लिए मुनाफे का जरिया बन चुके हैं। प्राइवेट…

आज के दौर में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता

एक नैतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की पुकार आज के भौतिकवादी और असहिष्णु समय में भगवान महावीर के विचार पहले से…

कैंटीन वाली चाय, रविवारीय में आज पढ़िए- “नशा जो बोतल में नहीं, कुल्हड़ में मिलता है”

दफ़्तर की शुरुआत ही चाय से होती है। चाय, वह भी कैंटीन वाली चाय। पता नहीं, क्या नशा है इस…