बेटियां: विरासत नहीं, संवेदना का सच
“पितृसत्ता की विरासत में बेटियों की अनदेखी” “लिपट के रोये हैं बेटियों से अपनी हालत पे, जो कहते थे विरासत…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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“पितृसत्ता की विरासत में बेटियों की अनदेखी” “लिपट के रोये हैं बेटियों से अपनी हालत पे, जो कहते थे विरासत…
“जब यार ही यमराज बन जाएं, तो मां-बाप किस पर भरोसा करें?” – डॉ सत्यवान सौरभ हरियाणा में इन दिनों…
बचपन की यादें ख़ासकर खाने पीने की यादें जब लौटकर आती हैं, तो अक्सर किसी ख़ास स्वाद के सहारे आती…
(चौपाल – गाँव की धड़कन) हरियाणा की ग्रामीण संस्कृति में ‘चौपाल’ सिर्फ एक बैठने की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक…
वे जब चलीं तो हाथ में कलम थी, पर राह में कांटे, पत्थर, हर कदम थी। सच की तलाश में…
“कलम का रणघोष: पत्रकारिता का सत्य-संघर्ष” “झुकी नहीं जो कलम: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की पुकार” “शब्दों का शस्त्र: जब…