“हरियाली तीज: झूले मन के, साज ऋतु के”
डॉ सत्यवान सौरभ झूले डोलें पीपल डाली, हरियाली ने चुनर संभाली। मेंहदी रचें हथेली प्यारी, सावन आई सखियों वाली। गीतों…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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डॉ सत्यवान सौरभ झूले डोलें पीपल डाली, हरियाली ने चुनर संभाली। मेंहदी रचें हथेली प्यारी, सावन आई सखियों वाली। गीतों…
21. बर्थडे केक नीलिमा का जन्मदिन था। सबने बधाइयाँ दीं — पति ने केक मंगाया, बेटे ने गाना गाया। लेकिन…
✍ डॉ. सत्यवान सौरभ “लव जिहाद” — एक ऐसा शब्द जो न तो भारतीय क़ानून में परिभाषित है, न संविधान…
(जब शिक्षा डर बन जाए) डिग्रियों की दौड़ में दम तोड़ते सपने संभावनाओं की कब्रगाह बनते संस्थान भारत में शिक्षा…
✍️ प्रियंका सौरभ भारत आज संसार का सबसे युवा देश है। हमारी जनसंख्या का लगभग पैंसठ प्रतिशत भाग पैंतीस वर्ष…
डॉ. सत्यवान ‘सौरभ’ सावन की रिमझिम बारिश, खेतों की हरियाली, पीपल के पेड़ पर पड़े झूले, और औरतों के गीतों…