रिश्तों का एटीएम: जब प्यार केवल ट्रांज़ैक्शन बन जाए
रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को…
कुछ औरतें मायके के बिना जीना सीख जाती हैं — न माँ की गोद, न भाई का कंधा, फिर भी…
क्या हो गया है इन औरतों को? अब ये आईना क्यों नहीं झुकातीं? क्यों चलती हैं तेज़ हवा सी, क्यों…
रिश्ते, भ्रम और हत्या इंदौर के राजा की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या, उसकी नवविवाहिता पत्नी द्वारा प्रेमी संग…
मिलावट अब केवल खाने-पीने तक सीमित नहीं रही, यह हमारे सोच, संबंध, और व्यवस्था तक में घुल चुकी है। मूँगफली…
✍️ डॉ. सत्यवान सौरभ हर घर की दीवारें अपने भीतर बहुत कुछ समेटे होती हैं—खुशियाँ, तकरार, उम्मीदें और त्याग। लेकिन…