“प्रेम, पीड़ा और प्रश्नों की गाथा: ‘राज सर आईपीएस'”

“जब व्यवस्था प्रेम को निगल गई: मंजू वर्मा की आत्मकथा पर एक दृष्टि” एक अधूरी कहानी का दस्तावेज: ‘राज सर…

रविवारीय- “चरित्र बनाम भाग्य: कहावत के पीछे का सच और समाज की सच्चाई”

“औरत का चरित्र और मर्द का भाग्य…” – एक सामाजिक विमर्श “त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम; देवो न जानाति कुतो मनुष्यः”…

आयुष्मान भारत या असहाय भारत: निजी अस्पतालों में योजना की लूट और लाचारी

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, परंतु निजी अस्पतालों द्वारा इसे लूट का…

 हादसे की ऊँचाई से गिरते सवाल: अहमदाबाद की एक दोपहर

“टेकऑफ से पहले अंत: 242 ज़िंदगियाँ और एक सवालों से भरा आसमान” “ड्रीमलाइनर या डेथलाइनर?: जब उड़ान ही आख़िरी सफर…