फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ: नौकरशाही, सत्ता और संवेदनहीनता
जब शासन सेवा से अधिक अहंकार बन जाए — फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ, सत्ता का चेहरा संवेदना का शून्य…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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जब शासन सेवा से अधिक अहंकार बन जाए — फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ, सत्ता का चेहरा संवेदना का शून्य…
विदेशी आरोपों के बीच भारतीयों का जवाब: एलआईसी पर भरोसा अडिग है एलआईसी ने 120% मुनाफा कमाया — पर वॉशिंगटन…
(डीपफेक का बढ़ता खतरा और सिंथेटिक सामग्री की लेबलिंग : नवाचार और जवाबदेही का संतुलन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न डीपफेक…
ना झाड़ो इतना घर को तुम, कि सब निशान मिटा डालो, कुछ धूल जमी रहने दो, यारो, यादों को फिर…
(धर्म से अधिक, समाज और संस्कृति का पर्व) छठ महापर्व केवल सूर्य की उपासना नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, स्त्री-सशक्तिकरण, पर्यावरणीय…
अभी हाल के दिनों में अख़बार की एक ख़बर थी – बिहार के बक्सर ज़िले के एक कूरियर कंपनी के…