सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ते राजनेताओं के बच्चे

(आख़िर ये कैसे जानेंगे दर्द) जब तक विधायक, मंत्री और अफसरों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते रहेंगे, तब तक…

रविवारीय- मृत्यु भी गरिमापूर्ण हो सकती है, ‘लिविंग विल’ के माध्यम से एक साहसी मानवीय विकल्प

कहाँ से कहाँ आ गए हम! अब जाकर ऐसा लगता है मानो हम सच्चाई को स्वीकार कर रहे हैं ।…

संस्थाएं डिग्रियां नहीं, ज़िंदगियां दें – तभी शिक्षा का अर्थ है

(जब शिक्षा डर बन जाए) डिग्रियों की दौड़ में दम तोड़ते सपने संभावनाओं की कब्रगाह बनते संस्थान भारत में शिक्षा…