रविवारीय- बिजनौर की घटना, जब माँ ने बेटे की विकृत चाहत के खिलाफ उठाया कठोर कदम

अविश्वश्नीय किन्तु सत्य  आजकल आए दिन अख़बार की सुर्खियों में पति- पत्नी के रिश्तों को कलंकित करने वाली घटनाएँ रहती…

गाँव-नगरों में ध्वज केवल पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के हाथों में लहराए

सैनिक ही असली ध्वजवाहक (79वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष संपादकीय) तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आत्मा…

साहित्य और सत्ता: तस्वीरों की चमक बनाम शब्दों का मूल्य

लेखक की सबसे बड़ी पूँजी उसके शब्द और उसकी स्वतंत्रता है, न कि सत्ता से नज़दीकी की तस्वीरें। प्रभावशाली व्यक्तियों…

अलविदा रजिस्टर्ड डाक — एक युग की ख़ामोश विदाई

लेखिका: डॉ. प्रियंका सौरभ एक सितंबर दो हज़ार पच्चीस को जब भारत डाक की रजिस्टर्ड डाक सेवा औपचारिक रूप से…

रविवारीय- लखनऊ से कानपुर का सफ़र, परंपरा, प्रेम और त्योहार की रौनक से भरा अनुभव

इस बार रक्षाबंधन का त्योहार शनिवार को पड़ा। हमारा दफ़्तर सप्ताह में पाँच दिन ही खुलता है, शनिवार और रविवार…