सत्यवान सौरभ की कविता – हुए शत्रु के मित्र !!
हुए शत्रु के मित्र !! दुनिया मतलब की हुई, रहा नहीं संकोच ! हो कैसे बस फायदा, यही लगी…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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हुए शत्रु के मित्र !! दुनिया मतलब की हुई, रहा नहीं संकोच ! हो कैसे बस फायदा, यही लगी…
(भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते…
(28 साल पहले एक कानून के माध्यम से इस पर प्रतिबंध लगाने एवं तकनीकी प्रगति के बावजूद, मानव अधिकारों के…
(भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से संबंधित मामलों के के निपटान, महिला सुरक्षा उपायों और हैंडलिंग के लिए दुनिया…
बदल रहे हर रोज ही, हैं मौसम के रूप ! ठेठ सर्द में हो रही, गर्मी जैसी धूप !! सूनी…
( केंद्रीय खुफिया विभाग( IB) में 1970 में नेशनल पुलिस एकेडमी माउंट आबू (राजस्थान) से ट्रेनिंग से इनका शुरू हुआ…