लोकतंत्र भी बच गया और सरकार भी बन गयी, क़त्ल हुआ तो सिर्फ वफाओं और वफादारियों का, ये उपेक्षा कब तक…..?

जम्हूरियत वो तर्ज़-ए-हुकूमत है, जिसमें बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते लोकतंत्र में ताकत और शक्ति की नहीं…

आखिर क्यों बदल रहे हैं मनोभाव और टूट रहे परिवार ?

(भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते…

क्यों भय के दुष्चक्र में है भारत की निर्भयाएं ?

(भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से संबंधित मामलों के के निपटान, महिला सुरक्षा उपायों और हैंडलिंग के लिए दुनिया…