लोकतंत्र भी बच गया और सरकार भी बन गयी, क़त्ल हुआ तो सिर्फ वफाओं और वफादारियों का, ये उपेक्षा कब तक…..?
जम्हूरियत वो तर्ज़-ए-हुकूमत है, जिसमें बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते लोकतंत्र में ताकत और शक्ति की नहीं…
BIHAR PATRIKA (बिहार पत्रिका) :: बदलाव का पथिक
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जम्हूरियत वो तर्ज़-ए-हुकूमत है, जिसमें बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते लोकतंत्र में ताकत और शक्ति की नहीं…
हुए शत्रु के मित्र !! दुनिया मतलब की हुई, रहा नहीं संकोच ! हो कैसे बस फायदा, यही लगी…
(भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते…
(28 साल पहले एक कानून के माध्यम से इस पर प्रतिबंध लगाने एवं तकनीकी प्रगति के बावजूद, मानव अधिकारों के…
(भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से संबंधित मामलों के के निपटान, महिला सुरक्षा उपायों और हैंडलिंग के लिए दुनिया…
बदल रहे हर रोज ही, हैं मौसम के रूप ! ठेठ सर्द में हो रही, गर्मी जैसी धूप !! सूनी…