पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है”- बशीर बद्र की शायरी छोड़ गई गहरा सन्नाटा
मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। पद्मश्री बशीर साहब गजल के उस्ताद माने जाते थे। अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र ने प्रोफेसर रहते हुए सरल और रूमानी गजलों से खास पहचान बनाई।
बशीर बद्र ने उर्दू गजल को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी शायरी में मोहब्बत, रिश्ते, तन्हाई, जिंदगी और इंसानी भावनाओं की गहरी झलक मिलती थी।
बशीर बद्र की की कुछ चर्चित शायरी
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों।
. ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं, पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है।
.यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं, मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे।
