मां नारधनी का चमत्कार जिस नियत से लोग आते है आज भी सबकी मुरादे होती है पूरी

कटोरिया (बांका) बिहार विशेषकर बांका की धरती कई चमत्कारों ऐतिहासिक घटनाओं और रहस्यमयी जगहों का केन्द्र रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की भौगोलिक दूरी खराब कनेक्टिविटी और प्रचार प्रसार की कमी के कारण ये स्थान मुख्यधारा के लोगों का ध्यान आकर्षित नही कर पाते हैं। बांका और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कई चमत्कारिक स्थल है, जो आज भी उपेक्षा का शिकार है।
हम आज बात कर रहे है कटोरिया प्रखंड के भोरसार पंचायत के वार्ड नम्बर दो नारदह गांव की, जिस गांव का नाम देवी देवताओं के नाम पर रखा है। आज हम मां नारधनी के चमत्का की बात कर रहे है। स्थानीय ग्रामीण एवं आसपास के रहने वाले लोंगों ने बताया कि आज से 70-80 वर्ष पहले मां नारदनी की चमत्कारी ऐसा था कि लोग देखखर दंग रह जाते थे। मां नारधनी के दरबार पर जो जिस नियत से हाजरी लगाते उसकी सभी मुरादे पुरी होती थी। नारदह गांव निवासी अर्शफी यादव ने बताया कि मेरे पिताजी कहा करते थे कि आज से सौ वर्ष पहले नारदह सहित आसपास के रहने वाले सभी समुदाय लोगों के घर शादी विवाह सहित अन्य कार्यक्रम में जो लोंग गरीबी के वजह से घर में ना तो बर्तन ना ही पकाने के राशन साम्रगी जुटा पाते थे। उस समय वर्तन भी ज्यादा नही हुआ करते थे। मां नारधनी की दरबार में हाजिरी लगाते थे। कहा जाता है कि मां थैलों में भरकर चावल ओर सभी तरह के बर्तन अपने आप रख जाते थे। जब लोंगों की नियत में गड़बड़ी होने लगी ओर मां के दरबार में मिला बर्तन नही लोटने लगा, तभी ही ये सिलसिला खत्म हो गया।

उन्होंने बताया कि मां कि दरबार में जो भी राहगीर मजदूर थकहारकर मां की चरणों के पास बैठता था, मां के दरबार से खाने के लिए दो लड्डू और पीने के लिए एक गिलास ठंडा पानी दिया करते थे। जब लोंगों की दिल में बेइमानी हुआ तो एक लड्डू खाने का दोनों खाने लगा। मां इससे नाराज होकर ये भी देना बंद किया। अशर्फी यादव के अनुसार राजाओं ने मां नारधनी के दरबार की गहराई का पता लगाने के लिए सात खाटी का रस्सी लगाकर गहराई का पता लगाने का कोशिश किया, पर वे विफल रहे। उन्होने बताया कि सात खाटी का रस्सी डुवाया तो रस्सी बौसी में निकला। स्थानीय ग्रामीण के अनुसार जो भी मां के दरबार के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की उसकी सारी नस्ल खत्म हो गयी। ग्रामीणों ने दावा किया कि कटोरिया के जमीदार परिवार के जमुना बाबु नें मां के दरबार से छेड़छाड़ की कोशिश की तो मां ने ऐसा श्राप दिया कि आज भी उसकी नस्ल बर्बाद हो गई। जो कलयुग में रहने वाले लोगों का उदाहरण है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कामडेवडीह गांव के रहने वाले गेना यादव मां का सच्चा भक्त था। मां ने ऐसा आर्शीवाद दिया कि उसके परिवार में दौलत की कमी नही है। आज भी उसके परिवार में डॉक्टर इंजीनियर नेता लोंग है। ग्रामीणों ने बताया कि मां नारदनी के दरवार में मकर संक्रांति के मौके पर 14-15 जनवरी को दूर दराज से लोंग पूजा करने आते है। मेला जैसा नजारा रहता है। प्रतिदिन मां के दरबार में मन्नत मांगने तथा पूजा पाठ करने के दूरदराज से लोग आते है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि एक देवघर जिला का जमीनदार का बहुत सा खेत हमारे गांव में है। जब वह अपने से खेती करना चाहता है तो वह उपजा कर नही ले जा सकता है। आज से तीन वर्ष पहले उन्होने पटवन के लिए पताल बोरिंग करने की कोशिश की विफल रहा है। हम सब ग्रामीण कहीं भी पटवन या पीने के लिए बोरिंग करते है तो सफल हो जाते है। ये सब मां नारधनी की आर्शीवाद है। उन्होनों ये भी दावा कि मां नारधनी हमलोग ग्रामीणों की रक्षा करती है। ग्रामीणों का दावा है कि हमारे गांव में कोई भी गलत नियत प्रवेश करने की कोशिश करते है तो गांव सीमा प्रवेश करते अंधा हो जाता है।पूर्व वार्ड पार्षद परमानंद यादव ने बताया कि यहां पूजा करने के लिए दूरदराज लोग प्रतिदिन आते है।मां दरबार तक पगडंडी रास्ते होकर मां के दरबार तक पहुंचना पड़ता है।

शिवनाथ यादव, राजू यादव, जोगिन्दर यादव, राजेन्द्र सादव, विश्वनाथ यादव, अरविंद यादव, सोनू यादव, विजय यादव, अखिलेश यादव, भोला यादव सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं (सड़क संचार) और प्रशासनिक मीडिया कवरेज की कमी के कारण ये केवल स्थानीय स्तर तक ही सीमित रह जाते है। सभी ग्रामीणों का कहना है जिला प्रशासन सहित जनप्रतिनिधि से मांग रखी है कि यहां मंदिर के साथ सड़क बनाया जाए ओर प्रचार प्रसार किया जाए।

बांका से दिलावर अंसारी की रिपोर्ट

इस आलेख में दी गई जानकारी की सत्यता की पुष्टि हम नहीं करते हैं। ये लेखक के द्वारा जुटाई गई अपनी जानकारी के आधार पर है।

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