रविवारीय- भारतीय क्रिकेट का नया नायाब हीरा, वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में रचा इतिहास

वैभव सूर्यवंशी

वैभव सूर्यवंशी, भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ एक नया सितारा । जिस उम्र में बच्चे यह तय नहीं कर पाते हैं कि उसे भविष्य में क्या करना है, उस उम्र में इसने भारतीय क्रिकेट में एक से बढ़कर

मनीश वर्मा ‘ मनु ‘
स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक
अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा

एक नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए । सबसे छोटी उम्र में भारतीय टीम में शामिल । इसे इस बच्चे की मेहनत कहें या फिर उपरवाले की तरफ से भारतीय क्रिकेट को दिया गया एक नायाब तोहफ़ा । कुछ भी कह लें, पर मेरे पास तो इसके लिए एक ही शब्द है-अद्भुत ! इसे अद्भुत नहीं तो और क्या कहा जाए । अपनी उपस्थिति तो इस बालक ने पिछले आई पी एल के दौरान ही दर्ज करा दी थी । इस आई पी एल में तो उसपर सिर्फ मुहर ही तो लगाई गई है । क्या बोला जाए इसे ? विश्व भर के दिग्गज खिलाड़ियों के बीच अपनी पहचान बनाना, पहचान ही नहीं बल्कि अपना लोहा मनवाना ! विश्व क्रिकेट के मंच पर एक महान खिलाड़ी का आगमन हो चुका है ।
जिस सहजता से इसने दिग्गज गेंदबाज़ों की बखिया उधेड़ी है, गेंदबाज़ों को तो वाक़ई रात में डरावने सपने आते होंगे । बाल सुलभ सहजता से यह कहना – मैं तो सिर्फ़ गेंद देखता हूँ उड़ाने से पहले । इन बातों से आप इस बच्चे की आत्मविश्वास , क्षमता और निडरता का बखूबी अंदाज़ा लगा सकते हैं !
पर साथ ही साथ हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि भारतीय क्रिकेट में एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का पदार्पण हुआ, पर उनमें से कुछ को ही लोग याद करते हैं । आगे बढ़ने के लिए सिर्फ खेल ही नहीं और भी बहुत कुछ मायने रखता है । आप थोड़ा सा भी ईधर से उधर हुए नहीं कि दूध से मक्खी की तरह निकाल फेंके जाएँगे । आपको आज जो माइलेज मिल रहा है वो आपके खेल के साथ ही साथ आपके उम्र की वजह से भी मिल रहा है । आपकी अग्नि परीक्षा तो अब होगी जहाँ विश्व पटल पर लोग तैयार बैठे हैं और आपपर निरंतर बेहतर प्रदर्शन करने का अतिरिक्त बोझ भी रहेगा ।
इसे किसी बंधन में मत बाँधिए । छोटा बच्चा है ये । इसे खुला और विस्तृत आकाश देने की ज़रूरत है ।
सबसे कम उम्र में भारतीय टीम में शामिल । अभी बहुत आगे जाना है । इस हीरे को और तराशने और सहेजने की ज़रूरत है । एक अनगढ़ हीरे की तरह है यह जिसे समय, मार्गदर्शन और धैर्य के साथ तराशने की ज़रूरत है ।इस हीरे की क़ीमत और चमक समय के साथ-साथ बढ़ती ही जाएगी । तुलना ना करें इसकी किसी से । इसे अपना नैसर्गिक खेल खेलने दें ।
जिस सहजता से इसने विश्व के बेहतरीन गेंदबाज़ों को खेला है उससे संपूर्ण क्रिकेट जगत अचंभित है । अकेले दम पर इसने आई पी एल में अपनी टीम राजस्थान रॉयल्स को पलेआफ में पहुंचाया ।
बस मुझे एक ही बात का डर सताता है, कहीं यह अपने मकसद से भटक न जाए । बहुत निर्दयी दुनिया है यह । अर्श से फ़र्श पर लाने में बिल्कुल भी वक्त नहीं लगाएगी । हमारे यहाँ क्रिकेट एक धर्म की तरह है । यहाँ हम भावनाओं में बहकर निर्णय लेते हैं । अपेक्षाओं का दवाब कुछ ज़्यादा ही होता है ।
खैर ! अब तक की जो तस्वीर इसकी सामने आई है उससे एक बात का अंदाज़ा तो लग ही गया है । संस्कारी बच्चा है । शब्दों का इस्तेमाल समझ बुझकर करता है । समय के साथ ही साथ और परिपक्वता दिखाते हुए अगर कुछ वर्ष इसने भारतीय क्रिकेट को दे दिया फिर तो भगवान ही मालिक हैं । कीर्तिमान कितने स्थापित होंगे अंदाज़ा लगाना मुश्किल होगा ।
बिहार क्रिकेट की स्थिति किसी से छिपी हुई नहीं है । जिन खिलाड़ियों ने विगत में अपना एक मुक़ाम बनाया है उसमें उनकी व्यक्तिगत क्षमता की भूमिका अहम रही है । हम भले ही इस बात पर अपनी पीठ थपथपा लें कि अमुक खिलाड़ी बिहार का है, पर जरा अपने दिल से पूछे कि हमारा योगदान क्या है?
एक दो दिन पहले की ख़बर थी बिहार का एक रणजी खिलाड़ी को आमरण अनशन पर बैठने की ज़रूरत पड़ गई । वजह ? सुनकर धक्का सा लगा । पैसे की माँग । अब बताएँ बेचारा खिलाड़ी क्या करे । हर कोई समृद्ध नहीं होता है । आख़िर क्या वजह है कि बिहार के खिलाड़ियों को बाहर जाकर अन्य राज्यों से खेलना पड़ता है । पूर्व में सबा करीम और वर्तमान में मुकेश कुमार, इशान किशन इसके गवाह हैं । सबा करीम के बाद तो बहुत अरसे तक बिहार क्रिकेट में सूखा पड़ा था । अमिकर दयाल ने भी बिहार क्रिकेट में अपना बहुमूल्य योगदान दिया, पर बिहार के खिलाड़ियों की बदहाली नहीं रोक सके ।
बिहार क्रिकेट संघ तो कुछ दिन पहले तक अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा था और आज जबकि वह उस हालत से बाहर आ चुका है तो अंदरूनी आपसी मतभेद से उसकी हालत ख़राब है । नुक़सान और किसी का नहीं खिलाड़ियों का ही हो रहा है । जो समृद्ध थे या फिर वैसे लोग जिनके पास साधन थे उन्होंने तो अपना रास्ता बना लिया, पर बाकियों का भगवान ही मालिक ।
अभी कुछ दिन पहले मेरी बातचीत एक एक कोचिंग चलाने वाले से हो रही थी । उसके पास लगभग सौ से अधिक प्रशिक्षु थे । मैंने उससे पूछा कि बताओ इसमें से कितने प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जो आगे चलकर अपने राज्य और अपने देश का नाम रौशन कर सकते हैं । उस व्यक्ति का जवाब सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ जब उसने नकारात्मक उत्तर दिया । कुकुरमुत्ता की तरह उग आए कोचिंग संस्थान सिर्फ और सिर्फ आपकी भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं । कल को अगर कोई सूर्यवंशी या फिर किशन उभर कर सामने आता है तो उसे अपना बताने की होड़ सी लग जाती है । हाँ! इसी कड़ी में हम अधिकारी साहब को याद करते हैं जिनके प्रशिक्षण में एक से खिलाड़ी निकले जिन्होंने अपना एक अलग मुक़ाम बनाया । सबा करीम और अमिकर दयाल उनमें से एक थे । अधिकारी साहब अब हमारे स्मृतियों में हैं ।
क्या किया जाए । हरि अनंत हरि कथा अनंता ।
खैर! कहने को तो बहुत कुछ है, पर शब्दों की भी अपनी एक सीमा होती हैं । हाँ इन सबके बीच एक बात और कहना चाहूँगा कि बिहार में क्रिकेटर के लिए स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन होना बहुत ही ज़रूरी है । कोई भी स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन यहाँ नहीं के बराबर है ।बीच के वर्षों में पुतुल फाउंडेशन के द्वारा आयोजित सुनैना वर्मा मेमोरियल क्रिकेट प्रतियोगिता ने इस खाली जगह को भरने की कोशिश की । महिला क्रिकेट के लिए उसने अपनी ओर से कोई कसर नही छोड़ी । क्रिकेट और क्रिकेटरों को ऊँचाई देने की उनकी पहल रंग ला रही थी । देश के चुनिंदा खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और यहाँ के खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत बने । लगभग पांच साल तक इस टूर्नामेंट का आयोजन होता रहा, पर कोरोना काल में जो यह बंद हुआ तो फिर इसकी शुरुआत नहीं हो सकी ।

एक बार फिर से भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने के लिए शुभकामनाएँ, और आशीर्वाद साथ ही साथ चयन समिति के सदस्यों को भी बधाई जिन्होंने इस नायाब हीरे को पहचाना। आनेवाला समय निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत रोमांचक हो सकता है

“ हरि अनंत हरि कथा अनंता “।
खैर! बिहार में खिलाड़ियों के लिए कोई अखिल भारतीय स्तर पर टूर्नामेंट भी नहीं होता है । पहले एक अखिल भारतीय स्तर पर एक स्कूली प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी । वहाँ से खेले हुए कई खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से अपने राज्य और अपने देश का नाम रौशन किया है ।यह प्रतियोगिता आज भी आयोजित की जाती है, पर बाहर के स्कूल इस प्रतियोगिता में पहले की तरह शिरकत नहीं करते हैं । कोरोना महामारी से पहले पुतुल फाउंडेशन ने अखिल भारतीय स्तर पर सुनैना वर्मा मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया था जिसमें देश भर के चुनिंदा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया । पांच साल तक यह टूर्नामेंट आयोजित होता रहा । आज भी इस टूर्नामेंट के सफलता की सुनहरी यादें यहाँ के लोगों के मानस पटल पर मौजूद हैं ।कोरोना महामारी में यह जो बंद हुआ तो फिर इसकी शुरुआत नहीं हो पाई । इस टूर्नामेंट में शिरकत कर रहे कई नामचीन खिलाड़ी यहाँ के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने । पुतुल फाउंडेशन ने महिलाओं के क्रिकेट में भी अपना योगदान दिया । ।

एक बार फिर से भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने के लिए शुभकामनाएँ, और आशीर्वाद साथ ही साथ चयन समिति के सदस्यों को भी बधाई जिन्होंने इस नायाब हीरे को पहचाना। आनेवाला समय निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत रोमांचक हो सकता है

मनीष वर्मा “मनु”

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