राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण, विपक्षी दलों का विरोध संकीर्ण मानसिकता का परिचायक- पटेल

राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ पर आपत्ति विपक्षी दलों का राष्ट्र-विरोधी मानसिकता- प्रेम रंजन पटेल

पटना, 28 अप्रैल 2026
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश के आलोक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार का यह निर्णय कि सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों एवं शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन गण मन का गान अनिवार्य रूप से किया जाना पूरी तरह उचित, संवैधानिक और राष्ट्रहित में है। विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा इस पर आपत्ति जताना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि उनकी संकीर्ण और वोट बैंक आधारित मानसिकता को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन गण मन केवल शब्दों का समूह नहीं हैं, बल्कि यह देश की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का प्रतीक है। इनका सम्मान करना और इन्हें गाना हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। यह किसी धर्म, जाति या वर्ग का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक है।

श्री पटेल ने कहा कि आज जब देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है, तब विपक्षी नेताओं का इस पर् अनावश्यक विवाद खड़ा कर देश की जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह साफ दिखता है कि उनके लिए राष्ट्रहित नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति सर्वोपरि है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि देशभक्ति किसी पर थोपी नहीं जाती, बल्कि यह भीतर से जागृत होती है, और राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान उस भावना को प्रबल करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। विद्यालयों और संस्थानों में इनका गान बच्चों और युवाओं में अनुशासन, सम्मान और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करता है।
पूर्व विधायक ने कहा कि विपक्षी दल इस विषय को राजनीति का माध्यम न बनाएं। देश की एकता और अखंडता से जुड़े मुद्दों पर उन्हें संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में सहयोग करना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो देश की जागरूक जनता उन्हें इसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। राष्ट्र सर्वोपरि है और रहेगा भी।

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