पटना साहिब – 49 साल से जेल में बंद मोहम्मदीन मियाँ का केस मुफ़्त में लड़ा और जेल से रिहा करवा कर मानवता की एक मिसाल क़ायम की थी रविशंकर ने, मुस्लिम समाज ने भी दिया समर्थन

पटना साहिब से भारतीय जनता पार्टी के लोक सभा प्रत्याशी के रूप में भारत के नामी वक़ील और बेदाग़ छवि वाले नेता रविशंकर प्रसाद का नाम घोषित किया जा चुका है।

इस नाम की उद्घोषणा के साथ ही पटना वासियों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है और वर्षों से पटना क्षेत्र से ग़ायब रहने वाले उनके संसद शत्रुघ्न सिन्हा का एक दमदार विकल्प उन्हें मिल गया है।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम समुदाय द्वारा उन्हें समर्थन देने की अपील

इसी उम्मीद के कारण हाल ही में पटना स्थित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, बिहार के संस्थापक मोहम्मद अफ़ज़ल इंजीनियर ने रविशंकर जी को पत्र लिख कर मुस्लिम समुदाय द्वारा उन्हें समर्थन देने अपील की है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है की कोंग्रेस की सरकारों ने मुसलमान समुदाय का शोषण किया और उन्हें विकसित नहीं होने दिया। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने विकास जम कर किया है और उसका लाभ मुसलमान समुदाय को भी हुआ है।इस लिए सबको स्वीकार्य और सबको साथ ले कर चलने वाले रविशंकर प्रसाद को सभी का साथ मिलेगा।

पहली बार भारतीय मुसलमान को हज करने के लिए जो कोटा दो गुना बढ़ा

वैसे ये भी सच है की पाकिस्तान के अलावा दुनिया के सभी बड़े इस्लामी देश चाहे वो साउदी अरब हो या संयुक्त अरब अमीरात हो या यमन, ओमान, सीरिया, फ़िलिस्तीन या फिर ईरान हों सभी आज मोदी जी के साथ खड़े हैं और पाकिस्तान के आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में भारत का साथ दे रहे हैं। ये आज से पहले कभी नहीं हुआ था। इसी दोस्ती के कारण पहली बार भारतीय मुसलमान को हज करने के लिए जो कोटा दिया गया था उसे साउदी अरब ने अब दो गुना बढ़ा दिया है।

49 साल से जेल में बंद मोहम्मदीन मियाँ का केस मुफ़्त में लड़ा था और उसे जेल से रिहा करवा कर मानवता की एक मिसाल क़ायम की थी

बहुत कम लोग जानते हैं की बतौर एक युवा वक़ील रविशंकर प्रसाद ने जब अपनी वकालत शुरू की थी तो 49 साल से जेल में बंद मोहम्मदीन मियाँ का केस मुफ़्त में लड़ा था और उसे जेल से रिहा करवा कर मानवता की एक मिसाल क़ायम की थी। मोहम्मदीन मियाँ मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति थे जिसे एक हत्या के केस में फँसाया गया था और केस की सुनवायी के दौरान उन्हें जेल में रखा गया था। बाद में ये केस चलता रहा और मोहम्मदीन मियाँ 49 साल तक जेल में सड़ते रहे बिना जुर्म साबित हुए। एक दिन एक अख़बार में युवा रविशंकर प्रसाद ने इस केस के बारे में पढ़ा और इसे मानवाधिकार के केस के नाते कोर्ट में फिर से उठाया। रविशंकर प्रसाद के प्रयासों से मोहम्मदीन मियाँ 49 साल बाद जेल से आज़ाद हुए। उनके परिवार के लोगों ने रविशंकर प्रसाद को बहुत दुआए दी।

आज भी जब रविशंकर प्रसाद जनता के दरबार में बतौर लोक सभा प्रत्याशी मुख़ातिब हो रहें हैं तो लोग इनकी बेदाग़ छवि और सभी धर्मों और जातियों को साथ ले कर चलने की प्रवृत्ति के क़ायल हो गए हैं और इन से जुड़ रहे हैं।

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