(अनुभव की बात, अनुभव के साथ )

वर्ष 2006 में पटना विश्वविद्यालय के अंतर्गत बीएन कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी उस वक्त चर्चा में आए, जब उनकी पत्नी ने उनकी एक शिष्या के साथ संबंधों पर मीडिया के सामने खूब हंगामा किया। तब प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी की उम्र 53 वर्ष थी, जबकि उनकी शिष्या जूली उनसे 30 वर्ष छोटी, 23वर्ष की थी। जानकारी के मुताबिक उनका ये प्रेम संबंध दो वर्ष पूर्व यानी 2004 से चल रहा था।वर्ष 2006 में हुए हंगामे के बाद प्रोफेसर मटुकनाथ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिजनों, दोस्तों एवं समाज में जलील होना पड़ा। पत्नी से लड़ाई झगड़ा और फिर केस मुकदमा। महाविद्यालय ने भी पहले निलंबित किया, फिर बर्खास्त किया और फिर अदालत के आदेश के बाद उन्हें पुनः बहाल किया। अभी दो दिन पूर्व 31अक्टूबर ,बुधवार को प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी सेवानिवृत्त हो गए।
प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी की शादी 1978 में आभा चौधरी से हुई थी। प्रोफेसर के अनुसार शादी के दो वर्ष बाद से ही पत्नी से उनके संबंध अच्छे नहीं रहे।पत्नी से उन्हें वो साथ नहीं मिलता और प्रोफेसर अकेलापन महसूस करते थे। इसी बीच कॉलेज की कक्षा में ही उनकी मुलाकात शिष्या जूली से होती है। प्रोफेसर बताते हैं कि जूली को देखते ही उनके मन में जूली के प्रति प्यार पनपता है। परंतु उम्र में काफी अंतर होने की वजह से वह संकोच में रहते हैं। दूसरी ओर जूली भी प्रोफ़ेसर को पसंद करने लगती है और जुली ही एक दिन प्रोफेसर को प्रेम का प्रस्ताव देती है।परिवार में अकेलापन महसूस करने वाले प्रोफेसर, जूली के इस प्रस्ताव को नकार नहीं पाते और उसे तत्काल ही स्वीकार कर लेते हैं। फिर हंगामा और समाज में उन्हें जलील होना पड़ता है।अनेक कठिनाइयों के बावजूद प्रोफेसर, जूली के साथ दस वर्षों तक लिव-इन में रहते हैं। दो वर्ष पूर्व जूली उनसे विदा ले लेती है। प्रोफेसर मटुकनाथ बताते हैं कि जूली का इस संसार से मोह भंग हो गया और वह अध्यात्म की ओर चली गई। परंतु फिर भी जूली उनका ख्याल रखती है और अक्सर फोन पर उनसे हाल-चाल पूछती रहती है।
इस सारे घटनाक्रम से सवाल ये उठता है कि इसमें क्या सही है और क्या गलत ? क्या प्रोफेसर मटुकनाथ का इस प्रकार अपने से तीस वर्ष छोटी शिष्या से प्यार करना जायज है ? आखिर जूली ने क्या सोंचकर प्रोफेसर से प्रेम का प्रस्ताव दिया और फिर दोनों ने ही इस संबंध को निभाया।जब यह घटना घटी थी तो हर जगह, समाचार पत्रों, टीवी के विभिन्न चैनलों पर यह चर्चा का विषय बनी हुई थी।लोग चुस्कियाँ लेकर चर्चा कर रहे थे। प्रोफेसर एवं जूली पर लोग तरह-तरह के लांछन लगा रहे थे। परंतु दस वर्ष तक साथ रहकर और फिर इस प्रेम संबंध को निभाकर प्रोफेसर ने एवं जूली ने समाज को यह दिखा दिया कि उनके संबंध वासना से वशीभूत नहीं थे। उनका संबंध शारीरिक आकर्षण से परे था और आज भी है। निश्चित रूप से इस प्रकार की घटना में लोग प्रोफेसर मटुकनाथ को दोषी मानते हैं। हाँ, मटुकनाथ गलत हैं, क्योंकि उन्होंने सामाजिक परंपराओं का निर्वाह नहीं किया। वह दोषी हैं, क्योंकि उन्होंने सामाजिक बंधनों से छेड़छाड़ की। वह गलत हैं, क्योंकि हमारे समाज में यह सब खुलेआम नहीं होता। होता तो है, लेकिन यह चोरी छुपे होता है। समाज में ऐसे कितने मर्द हैं जिनकी इस प्रकार के संबंधों की अभिलाषा नहीं रहती है? इस प्रकार की घटना हर समाज में,हर गांव में, हर शहर में हो रहे हैं। ऐसे संबंध पहले भी होते थे, आज भी हो रहे हैं और शायद आगे भी होते रहेंगे। फर्क यह है कि छोटे जगहों में यह छुप जाते हैं, तो बड़े शहर के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है।
प्रोफेसर इस प्रकार के प्रेम को “बौद्धिक प्रेम” कहते हैं। वह कहते हैं कि जब दो बुद्धिमान लोग मिलते हैं और उनमें जो स्वभाविक प्रेम पनपता है,उसे “बौद्धिक प्रेम” कहा जाता है। प्रोफ़ेसर बताते हैं कि अगर लोगों को प्रेम की स्वतंत्रता मिले तो धरती पर महान क्रांति घट सकती है। प्रेम करने वाला व्यक्ति आनंदित व्यक्ति होता है, और आनंदित व्यक्ति कभी विंध्वसात्मक नहीं होता। जो व्यक्ति आनंदित है सृजन उसी से संभव है। खैर, ये विचार प्रोफेसर मटुकनाथ के हैं।यह हमें तय करना है कि ये विचार हमारे लिए कितने उपयोगी हैं और सही हैं।
