क्या है पत्रकार पेंशन वृद्धि की पृष्ठभूमि ? जानिए सबसे पहले इस मुद्दे को संजय प्रकाश मयूख ने क्यों उठाया था ?

क्या है पत्रकारों के पेंशन वृद्धि की पृष्ठभूमि
बजट सत्र में बिहार से विधान परिषद् के सदस्य संजय प्रकाश मयूख ने पत्रकारों के पेंशन वृद्धि को लेकर मुद्दा उठाया था. इसके बाद से हीं ये मुद्दा काफी चर्चा में रहा. संजय मयूख परिषद् में अक्सर सामाजिक सारोकार और अन्य जरुरी मुद्दों को उठाते रहे हैं.

क्या कहा था संजय मयूख ने ?
बिहार बिहार विधान परिषद के शीतकालीन सत्र (29–30 नवंबर 2024) में भाजपा के विधान पार्षद संजय प्रकाश उर्फ संजय मयूख ने यह मुद्दा उठाया था कि राज्य में पत्रकारों को मिलने वाली मासिक पेंशन केवल 6,000 रुपए है, जो अन्य राज्यों जैसे हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में 15,000—20,000 रुपए प्रति माह दी जा रही थी.

अब क्या निर्णय लिया गया ?
26 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार सरकार की “Bihar Patrakaar Samman Pension Scheme” के अंतर्गत पत्रकारों की पेंशन में वृद्धि की घोषणा कर दी है. प्रमाणित पत्रकारों के लिए मासिक पेंशन बढ़ाकर ₹15,000 की गई। इसके साथ ही, मृत पत्रकारों की पत्नियों को अब ₹10,000 मासिक पेंशन मिलेंगे.
यह घोषणा ऐसे समय में की गई जब विपक्षी नेता तेजस्वी यादव द्वारा पत्रकारों पर विवादित टिप्पणियों के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों की भूमिका की सराहना करते हुए यह निर्णय लिया.

विश्लेषण और राजनीतिक पहलू
यह निर्णय संजय मयूख की की गई मांग का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है। मयूख ने जिस स्तर की वृद्धि की मांग की थी (15–20 हज़ार तक), सरकार ने ₹15,000 मासिक पेंशन का ऐलान किया — जो उनकी अपेक्षा का हिस्सा पूरक है।
भाजपा और जदयू गठबंधन सरकार ने इसे पत्रकारों को मान्यता और वित्तीय सुरक्षा देने वाली एक पहल के रूप में पेश किया है, जबकि विपक्ष इसको चुनाव पूर्व घोषणाओं की नक़ल और पॉलिटिकल रणनीति का हिस्सा बता रहा है.

इस निर्णय से बिहार के पत्रकारों को आर्थिक तौर पर सशक्तिकरण मिलेगी और यह प्रेस स्वतंत्रता एवं सम्मान को सार्थक समर्थन भी प्रदान करता है।

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