दिल्ली डायरी : मेला सूरजकुंड

कमल की कलम से

आज हम आपको लेकर चलते हैं एक अनोखा अंतर्राष्ट्रीय शिल्प उत्सव की सैर करने सूरजकुंड मेला को जो फरीदाबाद में है.

 

हरियाणा का फरीदाबाद इन दिनों पर्यटकों से गुलजार है, क्योंकि यहां लगा हुआ है सूरजकुंड अंतरर्राष्ट्रीय क्रॉफ्ट मेला जहाँ 37वें सूरजकुंड मेले की शुरुआत 2 फरवरी से हो चुकी है और 18 फरवरी को इसका समापन होगा.फरवरी में लगने वाले इस मेले का हम लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। अबकी बरस मेले में अफ्रीका, यूरोप और एशिया के लगभग 40 देश हिस्सा ले रहे हैं.

दुनियाँ भर के कलाकारों के लिए अपनी संस्कृति और प्रतिभा दिखाने का यह एक अनोखा मंच है. हर साल सूरजकुंड में हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित इस मेले में हर उम्र के पर्यटकों के लिए कई अनोखे आकर्षण होते हैं.
दक्षिण एशिया, अफ्रीका और यूरोप के 40 से अधिक देश इस मेले को बड़ी सफलता बनाने में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं.

सूरजकुंड, जिसका अर्थ है ‘सूर्य की झील’ जो एक प्राचीन जलाशय है जिसे 10वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा सूरज पाल ने बनवाया था. इस बार के मेले में तंजानिया पार्टनर देश व गुजरात थीम स्टेट है. मेले में करीब 300 नेशनल व स्टेट अवार्डी शिल्पकार अपनी कलाकृतियों को प्रदर्शित कर रहे हैं.इस बार मेले में हर बार की अपेक्षा अधिक देश शामिल हुए हैं। मेले में कई साल बाद कांगो का लोक नृत्य भी हमें देखने को मिल रहा है जिसका हमने सजीव प्रसारण भी किया था.

प्रदर्शन करने वाले विभिन्न देशों के शिल्पकार व कलाकार में कुछ
तंजानिया, बोत्सवाना, केप वर्डे, स्वाजीलैंड, इथोपिया, गाम्बिया, घाना, गिनी, केन्या, मैडागास्कर, मलावी, माली, मोजाम्बिक, नामीबिया, नाइजीरिया, साऊतोमे, टोन्गो, यूगांडा, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, अल्जीरिया, आर्मेनिया, बंगलादेश, बेलारूस, कान्गो, आयरलैंड, कजाखस्तान, लेबनान, मॉरीशस, म्यांमार, नेपाल, रूस, श्रीलंका, सीरिया, थाइलैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, यू.के., उज्बेकिस्तान, भूटान आदि देशों से कलाकारों की कला देखने को मिल रही है.मेले में खांडवी, थेपला, ढोकला, फाफड़ा, गुजराती कढ़ी, दूध पॉक, जैसे गुजराती व्यंजनों का स्वाद विशेष रूप से स्टॉल पर उपलब्ध हैं.

लक्कड़पुर और बहारपुर गांव के बीच रमणीय रूप से बसा हुआ फरीदाबाद के पास है सुरम्य सूरजकुंड गांव । रंगों की छटा, संगीत की गति और लाजवाब शिल्प कौशल इस आकर्षक मेले के सार को बखूबी दर्शाते हैं। यहाँ आपको किसी त्यौहार से कम मजा नहीं आता है, जिसके पीछे का मुख्य उद्देश्य हमारे देश में स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा और संस्कृति को बढ़ावा देना है। ऐसी दुनियाँ में जहां मशीनें पहले की तुलना में तेजी से इंसानों की जगह ले रही हैं, हरियाणा सरकार की यह छोटी सी पहल ग्रामीण शिल्प कौशल को बढ़ावा देती है और स्थानीय हथकरघा के निर्यात को भी बढ़ावा देती है.

इसके अलावे स्वादिष्ट ग्रामीण व्यंजनों के लुत्फ उठाने और स्थानीय कला की खरीदारी के साथ ओपन-एयर थिएटर में कुछ शानदार लोक नृत्य और संगीत कार्यक्रमों का आनंद भी ले सकते हैं.थीम गुजरात होने के कारण इसी हिसाब से ही मेले की सजावट और दूसरी तैयारियां की गई हैं. गुजरात पहनावे से लेकर खानपान, हस्तशिल्प हर एक में अपनी एक अलग खासियत समेटे हुए है. जिसके पसन्द करने वाले भारत ही नहीं, विदेशों में भी हैं.

गुजरात के अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की कला, शिल्प को देखने और यहां के व्यंजनों को चखने का मौका भी मिल रहा है. कई सारे देशों की बुनकर शैलियों और हथकरघे की भी झलक भी देखने को मिल रही है.बांधनी और पटोला साड़ियां गुजरात की खासियत है, तो लोग यहां आकर इन साड़ियों की ढेरों वैराइटी देख और खरीद रहे हैं. घर सजावट के लिए मेले में लकड़ी की बनी एक से एक खूबसूरत चीज़ें भी नजर आ रही है.

शॉल, कालीन, हाथ से बने तरह-तरह के आइटम्स और फैशनेबल ज्वैलरी भी उपलब्ध है.हैंडलूम साड़ियों की बात ही अलग होती है, तो यहां आकर लोग बहुत ही सस्ते दामों में इन्हें खरीद रहे हैं.लोक कलाकारों की कलाकारी हर थोड़े थोड़े समय पर उपलब्ध है.इस बार मेले में ‘ बोलती रामायण ‘ का स्टॉल नहीं होना सबको बहुत खटक रहा है.यह एक रेडियोनुमा यन्त्र है जिसमें रामायण , महाभारत , रामचरितत मानस , धार्मिक अनुष्ठान के सारे मन्त्र और विधि , भजन और आरती वर्णित है।सुबह सुबह इसे ऑन कर सुमधुर संगीत से वातावरण पवित्र हो जाता है और मन को भावविभोर कर जाता है.

मेले का समय प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक निर्धारित है.मेले के टिकट की कीमत दिन से हिसाब से तय की गई है. सोमवार से शुक्रवार यानी वीक डे में इसके लिए 120 रुपए चुकाने होंगे, तो वहीं शनिवार और रविवार यानी वीकेंड पर 180 रुपए चुकाने होंगे.वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80 रुपये ।

कैसे पहुँचें

बस नम्बर 717, 711, 511 बस स्टैंड सूरजपुर क्रासिंग से गुजरती है.वहाँ से ई रिक्शा 10 रुपये में मेला तक.मेट्रो स्टेशन तुगलकाबाद। वहाँ से मेल ग्राउंड तक बस की व्यस्था की गई है. या रिक्सा से 30 रुपये देकर जा सकते हैं.निजी वाहन के लिए कार पार्किंग की व्यवस्था है.

Related posts