23 व 24 फरवरी को होगा राष्टï्रव्यापी हड़ताल

पटना। राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) बिहार के प्रदेश अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सिंह ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों के राज्य स्तरीय कन्वेंशन को संबोधित करते हुए कहा कि व्यवसाय की सहूलियत के लिए श्रम सुधार के नाम पर 44 केंद्रीय श्रम कानूनों को निरस्त कर 04 लेबर कोड्स संसद से पारित कराया गया है। इस लेबर कोड्स के माध्यम से केंद्र की सरकार पूंजीपतियों एवं उद्योगपतियों को हायरिंग फायरिंग का पूर्ण अधिकार देकर देश के मेहनतकश मजदूरों को गुलाम बनाना चाहती है। देश के लोक उपक्रमों एवं अन्य सरकारी क्षेत्रों में भारी पैमाने पर निजीकरण को आगे बढ़ाया जा रहा है। बैंक, बीमा, रेल, सेल, भेल,एयर इंडिया, सी पोर्ट एवं अन्य नवरत्न कंपनियों में भी निजीकरण को बढ़ाया जा रहा है। साथ ही विनिवेश के माध्यम से निजी कंपनियों के हाथों हिस्सेदारी बेची जा रही है। ठेका प्रथा,आउटसोर्स एवं टर्म एंप्लॉयमेंट के जरिए स्थाई नियोजन को समाप्त किया जा रहा है। श्रमिक संघों के अधिकारों को सीमित करते हुए हड़ताल करने के संवैधानिक अधिकार को भी छीना जा रहा है। श्री सिंह ने यह भी कहा कि सामाजिक सुरक्षा से संबंधित भविष्य निधि एवं ईएसआई जैसे कानून भी इससे प्रभावित होंगे। निर्माण क्षेत्र में कार्यरत देश के करोड़ों मजदूरों के लिए गठित कल्याण बोर्ड जिसमें सेस के माध्यम से भिन्न राज्यों को मिलाकर करीब 50 हजार करोड़ रुपये जमा है इसके स्वरूप को  भी बदल कर मजदूरों का हकमारी किया जा रहा है। श्री सिंह ने कहा कि इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी संजीव रेड्डी के नेतृत्व में देश के अन्य केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर अपनी लंबित 10 सूत्री मांगों की प्रति हेतु आगामी 23 व 24 फरवरी  को पूरे देश के मजदूर राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने हेतु अभी से जुट जाएंगे।

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