बेगूसराय के अस्पताल से डॉ. राजेंद्र प्रसाद का नाम हटाने के मामले में नहीं हुई अबतक कोई कार्रवाई, मामले ने पकड़ा तुल

बेगूसराय : बेगूसराय सदर अस्पताल का नाम बदलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बीजेपी नेता आरके सिन्हा ने इस बाबत बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मगल पाण्डेय से बात भी की है। इस बात-चीत के बात हालाँकि मंत्री ने आश्वासन दिया है। दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन भी इस मामले में अपना पक्ष रख रहे हैं। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक बात पहुंचने के बाद अब कोर्ट ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। स्थानीय सीजीएम ने इस संबंध में डीएम को रिपोर्ट पेश करने को कहा है। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर बेगूसराय सदर अस्पताल का नामकरण दशकों पूर्व किया गया था, जिसका बोर्ड भी लगाया था। लेकिन 2015-16 में अस्पताल प्रबंधन ने अस्पताल की रंगाई-पुताई के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद का नाम मिटा दिया गया। उस समय से ही इसकी चर्चा होने लगी थी। लेकिन विगत एक सप्ताह से इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार सिन्हा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की और उन्हें अस्पताल प्रबंधन की इस मनमानी से अवगत कराया। श्री सिन्हा ने केंद्रीय मंत्री से सदर अस्पताल का नाम डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर करवाने के साथ-साथ प्रधानमंत्री तक इस मामले को पहुंचाने की बात रखी। जिस पर गिरिराज सिंह ने सकारात्मक आश्वासन भी दिया है। इस मामले को लेकर पूर्व विधान पार्षद सह जदयू जिलाध्यक्ष भूमिपाल राय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, जिसमें मनमानी दर्शाते हुए फिर से नाम लिखवाने का अनुरोध किया गया है।
बिहार प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष विधायक अमिता भूषण, आईएमए के सचिव डॉ. निशांत रंजन, जदयू विधान पार्षद रणवीर नंदन, सीपीआई के प्रभारी जिला मंत्री अवधेश राय, लनामिविवि के सीनेट सदस्य डॉ. सुरेश प्रसाद राय, बरौनी तेल शोधक मजदूर यूनियन एवं प्रगतिशील लेखक संघ के सचिव ललन लालिल्य, जिला वकील संघ के महासचिव संजीव कुमार, व्यवसायिक सुरक्षा वाहिनी के आलोक कुमार अग्रवाल आदि ने भी डीएम और सरकार को पत्र लिखा है।
दूसरी ओर तेघड़ा थाना क्षेत्र के बजलपुरा निवासी शैलेंद्र कुमार अभय ने बेगूसराय न्यायालय के सीजीएम कोर्ट में इस मामले को लेकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. आनंद शर्मा के विरुद्ध एक मामला दर्ज कराया है। जिस पर संज्ञान लेते हुए सीजीएम ने बेगूसराय के डीएम से जांच रिपोर्ट देने को कहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार सिन्हा ने बताया कि बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने भी डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान को देखते हुए गंगा नदी पर सिमरिया में बने रेल सह सड़क पुल तथा बरौनी डेयरी आदि का नामकरण राजेंद्र प्रसाद के नाम पर किया था।
उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल में भी डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा लगी हुई है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने ओछी मानसिकता के तहत महापुरुष का नाम मिटा दिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण कुकृत्य करने वाले सदर अस्पताल प्रबंधन के दोषी पर कार्रवाई होनी चाहिए।

कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय, बिहार के अध्यक्ष अभिजीत सिन्हा ने भी मुख्यमत्रीं नीतीश कुमार को पत्र लिख कर कहा कि स्वास्थ विभाग के अधीन बेगूसराय जिला में “डॉ राजेन्द्र प्रसाद सदर अस्पताल” का नाम बदल कर सदर अस्पताल बेगूसराय कर दिया गया है। भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति देश रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद को अपमानित करने का काम किया गया है। यह कार्य यहाँ के एक अदना सा पदाधिकारी उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ आनन्द शर्मा ने किया है।
पत्र में उन्होंने लिखा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति का गृह जिला सिवान ही है और बिहार में ही है आपके मुख्यमंत्रित्व काल मे भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति देश रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी को अपमानित किया जा रहा है। बेगूसराय में घटित इस आश्चर्यजनक घटना से पूरे बिहार वासियों को अपमानित होना पड़ रहा है। यह घटना बिहार के 12 करोड़ आवादी के जनमानस से जुड़ा है और सभी अपने को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को आगाह किया कि “राज्य में इस वर्ष विधान सभा चुनाव है और यह एक अतिसंवेदनशील मामला है। इसकी गंभीरता को देखते हुए अविलम्ब कार्यवाही की जाये।“
अभिजीत सिन्हा ने पत्र में आगे लिखा है कि “कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय इस मुद्दे पर बिहार निर्माता डॉ सचिदानंद सिन्हा रचना चक्र के विचारों का समर्थन करता है। अतः हम सब आपसे आग्रह करते है कि इस अतिसंवेदनशील मामले पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुये, बेगूसराय स्थित अस्पताल का नाम “डॉ राजेन्द्र प्रसाद सदर अस्पताल” किया जाए और इस घटना के लिए दोषी उप चिकित्सा अधीक्षक या जो कोई भी हो उसपर अविलंब कार्यवाही करते हुये पूर्व राष्ट्रपति को अपमानित करने के लिए उनके विरुद्ध उचित कानूनी कार्यवााही की जाये।“

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