साक्षात्कार- महादेवी वर्मा सम्मान से सम्मानित माया कुलश्रेष्ठ

_खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,_

 

_जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है,_

 

_लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादाँ,_

 

_जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी है…_

 

पटना, 31 मार्च ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस (जीकेसी) के सौजन्य से महान कवियित्री और सुविख्यात लेखिका महादेवी वर्मा की जयंती 26 मार्च के अवसर पर अंतराष्ट्रीय कत्थक नृत्यांगना माया कुलश्रेष्ठ को महादेवी वर्मा सम्मान से सम्मानित किया किया गया। जीकेसी के सौजन्य से राजधानी पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर में महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर कत्थक नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय देने के लिये माया कुलश्रेष्ठ निगम को महादेवी वर्मा सम्मान से सम्मानित किया गया। माया कुलश्रेष्ठ निगम ने जीकेसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजीव रंजन प्रसाद और जीकेसी की प्रबंध न्यासी श्रीमती रागिनी रंजन के प्रति आभार प्रकट करती हैं जिन्होंने इतने बड़े स्तर पर महादेवी वर्मा सम्मान का आयोजन किया और उन्हें सम्मान से नवाजा।

उन्होंने कहा कि सिर्फ कलाकार होकर आप अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं तो आप संपूर्ण कलाकार नहीं है, आपकी कला से सामाजिक समाज में एक बदलाव होना चाहिए।

दुनिया के सबसे बेहतरीन और मशहूर लोग वो होते है जिनकी अपनी एक अदा होती है…. वो अदा जो किसी की नक़ल करने से नही आती… वो अदा जो उनके साथ जन्म लेती है…!! माया कुलश्रेष्ठ निगम की शख्सियत की भी कुछ ऐसी हीं है। माया कुलश्रेष्ठ निगम ने न सिर्फ नृत्य बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ठ पहचान बनायी है। उनकी ज़िन्दगी संघर्ष, चुनौतियों और कामयाबी का एक ऐसा सफ़रनामा है, जो अदभ्य साहस का इतिहास बयां करता है। माया कुलश्रेष्ठ निगम ने अबतक के अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया।

श्री योगेन्द्र कुलश्रेष्ठ और श्रीमती अंजना कुलश्रेष्ठ के आंगन में जन्मीं माया कुलश्रेष्ठ के माता-पिता ने उन्हें अपनी राह खुद चुनने की आजादी दी थी।

माया के माता-पिता शिक्षक थे जबकि उनके भाई आयुष कुलश्रेष्ठ अधिवक्ता के तौर पर कार्यरत हैं। माया जब महज तीन वर्ष की थी तभी से वह अपने ग्वालियर स्थित स्कूल में नृत्य की प्रस्तुति दिया करती थी जिसे काफी पसंद किया जाता था। उन्होंने डांस की अपनी प्रारंभिक शिक्षा डा. अंजली बावर से हासिल की। माया कुलश्रेष्ठ निगम के पिता ने एक बार खजुराहो फिल्म फेस्टिबल में प्रसिद्ध भरतनाट्यम-ओडिसी नृत्यांगना पद्मभूषण सोनल मान सिंह की प्रस्तुति देखी। इसके बाद उनके पिता ने निश्चय किया कि वह अपनी बेटी को सोनल मान सिंह की तरह ही प्रख्यात डांसर बनायेंगे। माया कुलश्रेष्ठ ने राजा मान सिंह यूनिवर्सिटी कत्थक में एमए किया है जबकि उन्होंने

जीवाजी यूनवर्सिटी साइकॉलोजी में एमए किया है। माया कुलश्रेष्ठ निगम डीपीएस स्कूल के ग्वालियर ,बुलंदशाह में बतौर शिक्षिका के तौर पर भी काम किया। इसके अलावा वह एनआईपीडी में असिस्टेट प्रोफेसर के पद पर भी आसीन रही। माया कुलश्रेष्ठ ने लखनऊ घराने के उस्ताद कुमार श्रीमती गीतांजली लाल से कत्थक डांस सीखा है। वह पंडित बिरजू महाराज, शोभना नारायण और माधुरी दीक्षित की डांस शैली से बेहद प्रभावित है।माया कुलश्रेष्ठ सामाजिक कार्यों में भी काफी रूचि लेती है। वह पिछले आठ सालों से अपी संस्था कला एवं संस्कृति के जरिये नव कलाकारों को एवं दिव्यांग कलाकारों को आगे लाने का कार्य कर रही है। वह ट्रेनिंग कार्यक्रम कराती है जिसमें दिव्यांग बच्चों को नि.शुल्क शिक्षा दी जाती है। इसके अलावा वह दिल्ली समेत कई जगहों पर फेस्टिबल का आयोजन करती है जिससे इन बच्चों को सही मंच मिल सके।वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। माया कुलश्रेष्ठ अपने करियर के दौरान मॉरीशस, दुबई और यूएसए समेत कई देशों में परफार्म कर चुकी हैं। उन्हें मुरादाबादी यूथ, यूथ आईकॉन और नत्यश्री समेत कई सम्मान से नवाजा जा चुका है।अपनी हिम्मत और लगन के बदौलत माया कुलश्रेष्ठ ने आज शिक्षा के क्षेत्र के साथ ही कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुयी हैं लेकिन इन कामयाबियों को पाने के लिये उन्हें अथक परिश्रम का सामना भी करना पड़ा है। अपनी इस सफलता का वह श्रेय अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ ही अपने पति मनीष कुमार को भी देती है जिन्होंने उन्हें काफी सपोर्ट किया है।

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