बिहार की पहली वैज्ञानिक मधु उत्पादन और जैव विविधता परियोजना का मधेपुरा में शुभारंभ

मधेपुरा। बिहार में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मधेपुरा जिले के रामगंज गांव में राज्य की पहली वैज्ञानिक मधु उत्पादन एवं जैव विविधता पुनर्स्थापन परियोजना की शुरुआत की गई। यह पहल सीएसआईआर  फ्लोरिकल्चर मिशन – फेज़ 2 के तहत चल रही है, जिसे सीएसआईआर – नेशनल बॉटैनिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट, लखनऊ द्वारा रामालय फाउंडेशन के सहयोग से लागू किया जा रहा है। शुभारंभ कार्यक्रम में जिला प्रशासन, ब्लॉक विकास विभाग, वन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। तकनीकी सहयोग जीविका (कुमारखण्ड) के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज कुमार और मधुमक्खी वाला इंडस्ट्री, लखनऊ के संस्थापक निमित सिंह ने प्रदान किया। जिला उपायुक्त तरणजोत सिंह, आईएएस ने पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आमदनी बढ़ाने वाली इस पहल की सराहना की। उन्होंने परियोजना स्थल का दौरा करने और किसानों व वैज्ञानिकों से संवाद करने की इच्छा जताते हुए पूर्ण प्रशासनिक समर्थन का आश्वासन दिया। रामालय फाउंडेशन के संस्थापक प्रशांत कुमार ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य एक आत्मनिर्भर मॉडल तैयार करना है, जो जैव विविधता को बढ़ाए और किसानों की आय में वृद्धि करे। सीएसआईआर–एनबीआरआई की वैज्ञानिक टीम डॉ. सुशील कुमार, डॉ. बिकरमा सिंह और प्रोजेक्ट एसोसिएट प्रभात मौर्य—परियोजना के प्रशिक्षण और तकनीकी कार्यान्वयन की देखरेख करेंगे।

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