सेक्युलर’ सरकार द्वारा मंदिर चलाने का अर्थ है नास्तिकों के हाथों में धार्मिक मंदिरों की व्यवस्था होना

Posted on June 29, 2020 By बिहार पत्रिका डेस्क

डॉसुब्रह्मण्यम् स्वामी की याचिका पर सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशानुसार मंदिर में अनुचित व्यवस्थापन दिखाई देने पर शासन उसका नियंत्रण लेकर स्वयं ही नहीं चला सकताअपितु समस्या का निवारण होने तक ही मंदिर का अधिग्रहण कर सकता हैपरंतु वास्तविक रूप से सेक्युलर सरकार मंदिर नियंत्रित कर चला रही है। आज सरकार मंदिरों की लाखों एकड भूमि का उपयोग करती है। उसके लिए प्रतिवर्ष रुपए प्रति एकड का मूल्य मंदिरों को देकर उन स्थानों पर करोडों रुपए कमाती है। आज के बाजार भाव के अनुसार मंदिरों की भूमि का उचित किराया दिया जाए तो वह अरब डॉलर्स (7 हजार 500 करोड से अधिक रुपएहोगा। इससे मंदिर स्वयं की संस्थाएंगोशालापाठशाला चला पाएंगे। ‘सेक्युलर’ सरकार द्वारा मंदिर चलाए जानायह नास्तिकों के हाथों में मंदिर देने के समान हैऐसा वक्तव्य तमिलनाडु के ‘टेंपल वर्शिपर्स सोसाइटी’ के अध्यक्ष टीआररमेश ने किया।

हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित ‘हिन्दुआें के मंदिरों पर धर्मनिरपेक्ष शासन का नियंत्रण क्यों ?’ इस विषय पर विशेष परिसंवाद में वह बोल रहे थे। इसमें भाग्यनगर (हैदराबादके चिल्कुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सी.एसरंगराजनजीकेरल के ‘पीपल फॉर धर्म’ की अध्यक्षा शिल्पा नायरसर्वाेच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता किरण बेट्टदापुर और हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता  रमेश शिंदे सम्मिलित हुए थे। ‘फेसबुक’ और ‘यूट्यूब’ के माध्यम से यह कार्यक्रम 52 हजार से अधिक लोगों ने देखा तथा लाख 80 हजार से अधिक लोगों तक यह विषय पहुंचा ।

.एसरंगराजनजी इस समय बोले कि ‘‘मंदिरों में शासकीय अधिकारियों की नियुक्ति करने के कारण वहां का भक्तिभाव लुप्त होता जा रहा है। भक्तिमार्ग की सीख देने के लिए मंदिरों का सुरक्षित रहना आवश्यक है। मंदिर का धन देखकर मंदिर अधिग्रहण हो रहा होतो मंदिर की दानपेटियां हटाने पर ही शासन को सीख मिलेगी ।’’

मंदिर सरकारीकरण के विरोध में न्यायालयीन संघर्ष करनेवाले वरिष्ठ अधिवक्ता किरण बेट्टदापुर बोले कि ‘‘बेंगलुरू की ‘विधानसौध’ (विधानसभाके भवन का निर्माण कार्य 60 एकड भूमि पर किया गया है तथा वह भूमि ‘प्रभु अरळीमुन्नीश्वर मंदिर’ की है। शासन ने यह भूमि हडपकर वहां विधानसौध बनाया है। कर्नाटक में 35 हजार मंदिरों का सरकारीकरण हो चुका है तथा वहां की देवनिधि का उपयोग उचित पद्धति से नहीं किया जाता  यह वैसा ही है कि बाड स्वयं ही खेत खा गई है। यह अत्यंत संतापजनक है।’’

इस अवसर पर श्रीमती शिल्पा नायर ने कहा कि, ‘‘केरल की सेक्युलर कम्युनिस्ट सरकार हिन्दुआें के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप करती है। धर्मनिरपेक्ष सरकार की लापरवाही के कारण मंदिरों की लाखों एकड भूमि हडप ली गई है। कोची देवस्वम् बोर्ड के अंतर्गत आनेवाले मंदिरों की 55 हजार एकड भूमिगुरुवायूर देवस्वम् बोर्ड की भूमि  गुरुवायूर देवस्वम् बोर्ड के मंदिरों की 13 हजार 500 एकडकूडलमाणिक्यम मंदिर की 75 हजार एकड तथा मलबार देवस्वम् बोर्ड के मंदिरों की लाख एकड भूमि असामाजिक तत्त्वों ने हडप ली है। यह रोकने के लिए मंदिरों का व्यवस्थापन भक्तों को ही सौंपना चाहिए। ’’

 रमेश शिंदे बोले किमंदिरों का मुख्य उद्देश्य धर्म का प्रसार करना है । चर्च में बाइबिल और मस्जिदों में कुरान सिखाई जाती होतो मंदिरों में भगवद्गीता क्यों नहीं सिखाई जाती मंदिरों से हिन्दू धर्म का प्रचार करने के लिए ‘मंदिर और संस्कृति रक्षा आंदोलन’ के नाम से राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जा रहा है। इस अवसर पर सी.एसरंगराजनजी के करकमलों से मलयालम भाषा में सनातन संस्था के ‘’ जालस्थल का लोकार्पण किया गया 

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