नवरात्री विशेष – सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख पटना के पटन देवी मंदिर उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं हैं विराजित

Posted on March 28, 2020 By बिहार पत्रिका ब्यूरो

बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटन देवी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है. देवी भागवत और तंत्र चूड़ा मणि के अनुसार, सती की दाहिनी जांघ यहीं गिरी थी. नवरात्र के दौरान यहां काफी भीड़ उमड़ती है. सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख इस उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं विराजित हैं. पटन देवी भी दो हैं- छोटी पटन देवी और बड़ी पटन देवी, दोनों के अलग-अलग मंदिर हैं.

पटना की नगर रक्षिका भगवती पटनेश्वरी हैं जो छोटी पटन देवी के नाम से भी जानी जाती हैं. यहां मंदिर परिसर में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वर्णाभूषणों, छत्र व चंवर के साथ विद्यमान हैं. लोग प्रत्येक मांगलिक कार्य के बाद यहां जरूर आते हैं.

इस मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसे ‘पटनदेवी खंदा’ कहा जाता है. कहा जाता है कि यहीं से निकालकर देवी की तीन मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया गया था. वैसे तो यहां मां के भक्तों की प्रतिदिन भारी भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के प्रारंभ होते ही इस मंदिर में भक्तों का तांता लग जाता है.गुलजार बाग इलाके में स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर परिसर में काले पत्थर की बनी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमा स्थापित हैं. इसके अलावा यहां भैरव की प्रतिमा भी है.

जानकारो का कहना है कि सम्राट अशोक के शासनकाल में यह मंदिर काफी छोटा था. इस मंदिर की मूर्तियां सतयुग की बताई जाती हैं. मंदिर परिसर में ही योनिकुंड है, जिसके विषय में मान्यता है कि इसमें डाली जाने वाली हवन सामग्री भूगर्भ में चली जाती है. देवी को प्रतिदिन दिन में कच्ची और रात में पक्की भोज्य सामग्री का भोग लगता है. यहां प्राचीन काल से चली आ रही बलि की परंपरा आज भी विद्यमान है.

भक्तों की मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से यहां आकर मां की अराधना करते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. मंदिर के महंत विजय शंकर गिरि बताते हैं कि यहां वैदिक और तांत्रिक विधि से पूजा होती है.वैदिक पूजा सार्वजनिक होती है, जबकि तांत्रिक पूजा मात्र आठ-दस मिनट की होती है. परंतु इस मौके पर विधान के अनुसार, भगवती का पट बंद रहता है. वे बताते हैं कि सती की यहां दाहिनी जांघ गिरी थी, इस कारण यह शक्तिपीठों में से एक है. वे कहते हैं कि यह मंदिर कालिक मंत्र की सिद्धि के लिए प्रसिद्ध है.

नवरात्र में यहां महानिशा पूजा की बड़ी महत्ता है. जो व्यक्ति अर्धरात्रि के समय पूजा के बाद पट खुलते ही 2.30 बजे आरती होने के बाद मां के दर्शन करता है उसे साक्षात् भगवती का आशीर्वाद प्राप्त होता

Related Post

बिहार बंद के दौरान अफरातफरी का माहौल, डाकबंगला चौक हजारों की संख्या प्रदर्शनकारी मौजूद

बिहार बंद को लेकर पुरे बिहार में कई जगहों पर प्रदर्शन जारी है। पटना के डाकबंगला चौक पर अफरातफरी का…

कुम्हारार के विधायक अरुण कुमार सिन्हा द्वारा महेंद्रू पोस्ट ऑफिस के सामने स्थित CSC सेंटर का उद्घाटन किया

Posted by - November 14, 2019 0
कुम्हारार के विधायक अरुण कुमार सिन्हा द्वारा महेंद्रू पोस्ट ऑफिस के सामने स्थित CSC सेंटर का उद्घाटन किया गया.CSC सेंटर…

दवाई से ज्यादा फायदा पहुंचाती है फिजियोथेरेपी : डॉ राजीव कुमार सिंह

Posted by - August 21, 2019 0
अधिकांश लोग फिजियोथेरेपी को वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से ज्यादा महत्व नहीं देते, लेकिन वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता बेहद महत्‍वपूर्ण हो…

मसौढ़ी:अग्निकांड पीड़ितों के मदद के लिए उठे कई हाथ, विधायिका सहित कई समाजसेवी संगठन आए सामने ।

Posted by - December 17, 2018 0
(मसौढ़ी से नीरज कुमार की रिपोर्ट) मसौढ़ी: बीते शाम हुए मसौढ़ी स्टैंड के पास अगलगी में सैकड़ों झुगी झोपड़ी में…

पटनाइट्स को बचाने के लिए नीतीश ने सम्भाला मोर्चा, सम्प हाउस का किया निरीक्षण

पटनाइट्स को बचाने के लिए नीतीश ने सम्भाला मोर्चा, सम्प हाउस का किया निरीक्षण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सैदपुर के…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

想要变美,想要拥有傲人的双峰丰胸产品,选择纯天然美胸产品——燕窝酒酿蛋!燕窝酒酿蛋的诞生摒弃了外用丰胸的不便产后丰胸方法,远离了胶囊丰胸副作用的威胁,全面解决女性胸部的各种问题燕窝酒酿蛋。无论你是天生平胸,还是产后胸部下垂,只要你坚持使用燕窝酒酿蛋丰胸产品粉嫩公主酒酿蛋,你也能拥有丰满坚挺的双胸!