पटना का महावीर मंदिर- 1730 ई० में स्वामी बालानंद ने किया था स्थापित, 1948 में पटना हाइकोर्ट ने किया सार्वजनिक मंदिर घोषित, आचार्य किशोर कुणाल के प्रयास से साल 1983 के बाद हुआ बीच वर्तमान मंदिर का निर्माण शुरु

Posted on February 7, 2020 By बिहार पत्रिका ब्यूरो

जानिए क्यो खास है #पटनाकामहावीर_मंदिर …..

बिहार की राजधानी पटना के हृदयस्थली अवस्थित उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध मंदिर है। सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर में रामनवमी के दिन अयोध्या की हनुमानगढ़ी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है। इस मंदिर में आकर शीश नवाने से भक्तों की मनोकामना पूर्ति होती है। इस मंदिर को हर दिन लगभग एक लाख रुपये की राशि विभिन्न मदों से प्राप्त होती है। इस मंदिर को 1730 इस्वी में स्वामी बालानंद ने स्थापित किया था।

1948 में पटना हाइकोर्ट ने सार्वजनिक मंदिर किया घोषित

साल 1900 तक यह मंदिर रामानंद संप्रदाय के अधीन था। उसके बाद इसपर 1948 तक इसपर गोसाईं संन्यासियों का कब्जा रहा। साल 1948 में पटना हाइकोर्ट ने इसे सार्वजनिक मंदिर घोषित कर दिया। उसके बाद आचार्य किशोर कुणाल के प्रयास से साल 1983 से 1985 के बीच वर्तमान मंदिर का निर्माण शुरु हुआ और आज इस भव्य मंदिर के द्वार सबके लिए खुले हैं।

इस मंदिर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा की ओर है और मंदिर के गर्भगृह में भगवान हनुमान की मूर्तियां हैं। इस मंदिर में सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां की एक खास बात यह है कि यहां रामसेतु का पत्थर कांच के बरतन में रखा हुआ है। इस पत्थर का वजन 15 किलो है और यह पत्थर पानी में तैरता रहता है।

यहां बजरंग बली की युग्म मूर्तियां एक साथ हैं

यह मंदिर बाकी हनुमान मंदिरो से कुछ अलग है, क्योंकि यहां बजरंग बली की युग्म मूर्तियां एक साथ हैं। एक मूर्ति परित्राणाय साधूनाम् अर्थात अच्छे लोगों के कारज पूर्ण करने वाली है और दूसरी मूर्ति- विनाशाय च दुष्कृताम्बु, अर्थात बुरे लोगों की बुराई दूर करने वाली है।

पटना जंक्शन परिसर से सटे है

यह मंदिर पटना रेलवे स्टेशन से निकल कर उत्तर दिशा की ओर स्थित है| प्रसिद्ध महावीर मंदिर पटना जंक्शन परिसर से सटे ही बना हुआ है। मंदिर प्राचीन है, जिसे 80 के दशक में नया रंग-रूप दिया गया। पटना आने वाले श्रद्धालु यहां सिर नवाना नहीं भूलते। लाखों तीर्थयात्री इस मंदिर में आते हैं।यहां मंगलवार और शन‌िवार के द‌िन सबसे अध‌िक संख्या में भक्त जुटते हैं। यहां हनुमान जी को घी के लड्डू, नैवेद्यम का भोग लगाया जाता है, ज‌िसे तिरुपति के कारीगर तैयार करते हैं। हर द‌िन यहां करीब 25,000 लड्डूओं की ब‌िक्री होती है।

महावीर मंद‌िर ट्रस्ट के अनुसार इन लड्डूओं से जो पैसा आता है वह महावीर कैंसर संस्‍थान में उन मरीजों पर खर्च क‌िया जाता है जो आर्थ‌िक रूप से कमजोर हैं और कैंसर का इलाज करवाने में सक्षम नहीं हैं।

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