सोलह वर्षों के बाद दुर्लभ संयोग में अक्षय तृतीया आज, व्रत-दान से मिलेगा अक्षय पुण्य

Posted on May 7, 2019 By बिहार पत्रिका ब्यूरो

हिन्दू धर्म में वैशाख मास पुण्य मास माना जाता है। वैशाख शुक्ल तृतीया यानि अक्षय तृतीया आज ग्रह-गोचरों के दुर्लभ संयोग में मनायी जाएगी। मान्यता है कि अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त है तथा इस तिथि पर किया गया व्रत-दान आदि अक्षुण्ण रहता हैं। इस दिन स्वर्ण, धातु और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी का विशेष महत्व होता है।

 

कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित राकेश झा शास्त्री ने बताया कि आज अक्षय तृतीया के दिन से ही त्रेता और सतयुग का आरंभ हुआ था, इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहा गया हैं। भविष्य पुराण के अनुसार आज के दिन स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय, तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं, वे सब अक्षय हो जाते हैं। इस दिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए भगवान विष्णु- माता लक्ष्मी व गौरी की पूजा तथा व्रत रखती है। पूजा में भगवान विष्णु व लक्ष्मी को श्वेत कमल, सफेद फूल तथा कमलगट्टा अर्पण कर अक्षय पुण्य व वैभव की कामना करती है। इस तिथि पर विशेषकर व्यवसाय आदि शुरू करने से उसका नाश नहीं होता है I अक्षय तृतीया के दिन दान देने वाला प्राणी सूर्यलोक को प्राप्त करता है। आज के दिन उपवास करने से रिद्धि-वृद्धि और श्री से संपन्न हो जाता है।

सोलह वर्ष बाद बना दुर्लभ संयोग

पंडित झा ने पंचांगों का हवाला देते हुए कहा कि आज अक्षय तृतीया पर पांच बड़े ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है। ऐसा योग बेहद दुर्लभ माना जाता है। पिछली बार यह संयोग वर्ष 2003 में बना था। आज अक्षय तृतीया पर पांच बड़े ग्रह सूर्य, शुक्र, चन्द्र, राहू और केतु अपने उच्च राशि में होंगे। इसके साथ ही गुरु-मंगल के केंद्र में रहने से परिजात योग भी बन रहा है I यह संयोग अति पुण्य फलदायी होगा I इसके साथ ही इस तिथि पर चन्द्र व मंगल के अपने नक्षत्र में रहने से महालक्ष्मी योग भी बन रहा है। जहां चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र में वहीं मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेंगे I अक्षय तृतीया पर इस शुभ योग के होने से माता लक्ष्मी की असीम कृपा भक्तों पर बरसेगी। पंडित झा ने कहा कि इस तिथि पर सिद्द्योग और रवियोग होने से इसकी महत्ता और बढ़ गयी है।

अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व

पंडित झा ने धार्मिक मान्यताओं के आधार पर बताया कि अक्षय तृतीया के दिन ही महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था। भगवान विष्णु के अवतार नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अविर्भाव भी इसी तिथि को हुआ था। उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम के कपाट भी आज ही के दिन पुनः खुलते हैं और इसी दिन से चारों धामों की पावन यात्रा प्रारम्भ हो जाती है। वृन्दावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मंदिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। बाकी पूरे वर्ष चरण वस्त्रों से ही ढके रहते हैं।

 

गलंतिका बंधन से मिलता है शुभ फल

पंडित झा के अनुसार वैशाख मास में शिवलिंग पर जल चढाने या गलंतिका बंधन करने का (मटकी लटकाना) विशेष पुण्य बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार इस माह में जल दान का सर्वाधिक महत्व है। ज्योतिषी झा के मुताबिक अनेकों तीर्थ करने से जो फल प्राप्त होता है, वह केवल वैशाख मास में जलदान करने से प्राप्त होता है। आज के दिन छाता, जुत्ता, पंखा का दान करने से ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों देवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो विष्णुप्रिय वैशाख में पादुका दान करता है, वह यमदूतों का तिरस्कार करके विष्णुलोक को प्राप्त करता है ।

नीम की कोपल और सत्तू का लगाएं भोग

ज्योतिषी राकेश झा शास्त्री ने बताया कि आज के पवित्र नदी या घर में ही स्नान करने के बाद भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की शांत चित्त होकर पूजा किया जाता है। आज लक्ष्मीनारायण की पूजा सफ़ेद, पीले रंग के कमल या गुलाब के पुष्प से करनी चाहिए। नैवेद्य में गेहूं, जौ, चने का सत्तू, मिश्री, नीम की कोपल, ककड़ी और चने की भीगी दाल अर्पित की जाती है। अक्षय तृतीया के दिन जल से भरे घड़े, कुल्हड़,सकोरे, पंखे, पादुका, चटाई, छाता, चावल, नमक, घी, ख़रबूज़ा, ककड़ी, मिश्री, सत्तू आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान महा पुण्यकारी माना गया है।

पूजन व खरीदारी का शुभ मुहूर्त

पूजा का शुभ मुहूर्त- प्रातः 05:40 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक

स्वर्ण व अन्य सामग्री की ख़रीदारी का मुहूर्त- सुबह 06:26 बजे से रात्रि 11:47 बजे तक

तृतीया तिथि आरंभ- 06 मई को रात्रि 03:24 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त- 07 मई को रात्रि 02:20 बजे

राशि के अनुसार करे दान-पुण्य, मिलेगा समस्याओं से निजात

मेष- हरी वस्तु या सुगन्धित वस्तु का दान करें। इससे आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

वृष- पीली वस्तु का दान करें। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय होगा।

मिथुन- लाल वस्तु या मीठी वस्तु का दान करें। इससे कैरियर में आने वाली बाधाओं से निजात मिलेगी।

कर्क- काले रंग की वस्तु या घट का दान करें। इससे विपदाओं से छुटकारा मिलेगा।

सिंह- सफ़ेद वस्तुओं या स्वर्ण का दान करें। इससे धन संपत्ति में वृद्धि होगी।

कन्या- लाल फल,गुड़ या सत्तू का दान करें। इससे स्वभाव और पारिवारिक जीवन उत्तम होंगे।

तुला- पीली वस्तु या पीले वस्त्र व बेल शर्बत का दान करना उत्तम होगा। इससे आर्थिक तंगी से निजात मिलेगा।

वृश्चिक- काले वस्त्र या काली दाल का दान करें। इससे संतान सुख की प्राप्ति होगी।

धनु- हरी या सुगंधित वस्तु व सत्तू का दान करना शुभ होगा। इससे रोजगार में विस्तार होगा।

मकर- लाल या मीठी वस्तुओं व घटदान करना उत्तम रहेगा। इससे कर्ज से छुटकारा मिलेगा।

कुंभ- पीली वस्तु या जलपात्र का दान शुभ होगा। इससे मानसिक समस्याएँ से निजात मिलेगी। मीन- सफ़ेद खाद्य वस्तु का दान करना उत्तम होगा। इससे स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।

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