IPO खुलने से पहले जियो पर ₹2.5 लाख करोड़ के दांव, इश्यू साइज से 8 गुना ज्यादा मांग

• रिटेल निवेशकों के लिए प्री-बुकिंग शुरू, कई ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर कर सकते हैं प्री-अप्लाई
• बड़े घरेलू और ग्लोबल संस्थागत निवेशकों से ₹2.5 लाख करोड़ की शुरुआती मांग- मीडिया रिपोर्ट्स
• एंकर निवेशकों की बिडिंग 19 अक्टूबर को, आईपीओ 21 से 23 अक्टूबर तक खुलेगा

मुंबई, 17 अक्टूबर 2026: जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ खुलने से पहले ही निवेशकों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ रिटेल निवेशकों के लिए कई ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर प्री-बुकिंग यानी प्री-अप्लाई शुरू हो गई है, वहीं दूसरी तरफ बड़े बिजनेस मीडिया हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने जियो आईपीओ के लिए करीब ₹2.5 लाख करोड़ की शुरुआती मांग दिखाई है। यह करीब ₹30,200 करोड़ के पूरे आईपीओ साइज से आठ गुना से भी ज्यादा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जियो आईपीओ के लिए आई करीब ₹2.5 लाख करोड़ की शुरुआती संस्थागत मांग में विदेशी लॉन्ग-ओनली फंड्स, सॉवरेन वेल्थ फंड्स, बड़े म्यूचुअल फंड्स और बीमा कंपनियां शामिल हैं। हालांकि इसे अभी औपचारिक आईपीओ सब्सक्रिप्शन नहीं माना जा सकता। यह बड़े निवेशकों की शुरुआती मांग और अलॉटमेंट में दिलचस्पी का संकेत है।

अलॉटमेंट में दिलचस्पी दिखाने वाले बड़े निवेशकों में जीआईसी, नॉर्जेस बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे सॉवरेन फंड्स के साथ ब्लैकरॉक, फिडेलिटी और कैपिटल ग्रुप के नाम सामने आए हैं। घरेलू निवेशकों में एलआईसी, एसबीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड जैसे बड़े नाम बताए गए हैं।

इधर, रिटेल निवेशकों के लिए जियो आईपीओ की प्री-बुकिंग शुरू हो गई है। कई ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर निवेशक अभी से अपना आवेदन दर्ज कर सकते हैं। हालांकि यह औपचारिक सब्सक्रिप्शन नहीं है। प्री-अप्लाई में निवेशक पहले से अपना ऑर्डर दर्ज करता है, जिसे आईपीओ खुलने के बाद आगे प्रोसेस किया जाता है।

जियो आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर है और न्यूनतम लॉट 12 शेयरों का है। ऊपरी प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹13,428 की जरूरत होगी। आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा।

इससे पहले एंकर निवेशकों के लिए बिडिंग 19 अक्टूबर को होगी। इसके बाद तस्वीर साफ होगी कि अभी दिख रही भारी संस्थागत दिलचस्पी औपचारिक एंकर अलॉटमेंट और बाद में आईपीओ सब्सक्रिप्शन में किस स्तर तक बदलती है।

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