पटना। वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (WJAI) ने छात्रों के शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन की आड़ में असामाजिक तत्वों द्वारा की गई हिंसा, आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने तथा अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे पत्रकारों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है।
लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान, हिंसा का विरोध
संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी भी आंदोलन को हाईजैक कर हिंसा फैलाना और समाचार संकलन में जुटे पत्रकारों को निशाना बनाना लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आज़ादी पर सीधा हमला है। पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी हैं और उन पर हमला किसी भी सभ्य समाज के लिए अस्वीकार्य है।
लोकतांत्रिक मूल्यों के शत्रुओं पर हो कठोर कार्रवाई- आनंद कौशल
वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनन्द कौशल ने कहा, “शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को हिंसा में बदलने वाले असामाजिक तत्व लोकतांत्रिक मूल्यों के शत्रु हैं। पत्रकारों पर हुए हमले अत्यंत चिंताजनक हैं। सरकार ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।”
पत्रकारों की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी- अमित रंजन
राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अमित रंजन ने कहा, “समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है। पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र की आँखों पर हमला है। दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा घायल पत्रकारों को समुचित सुरक्षा और सहायता प्रदान की जाए।”
लोकतंत्र संवाद से चलता है, हिंसा से नहीं- मधुप मणि “पिक्कू”
राष्ट्रीय महासचिव मधूप मणि ‘पिक्कू’ ने कहा, “हिंसा किसी भी जनआंदोलन की वैधता को कमजोर करती है। जो लोग छात्रों के आंदोलन की आड़ लेकर अराजकता फैला रहे हैं और मीडिया कर्मियों को निशाना बना रहे हैं, उन्हें कानून के कठघरे में लाया जाए। लोकतंत्र संवाद से चलता है, हिंसा से नहीं।”
WJAI की प्रमुख मांगें
वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने राज्य सरकार, प्रशासन एवं पुलिस से मांग की है कि हिंसा एवं पत्रकारों पर हमले में शामिल सभी असामाजिक तत्वों की निष्पक्ष पहचान कर उनके विरुद्ध त्वरित एवं कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पत्रकारों की सुरक्षा के प्रभावी एवं स्थायी उपाय सुनिश्चित किए जाएँ, ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्र एवं निर्भीक कार्यप्रणाली सुरक्षित रह सके।
