विदुषी कवयित्री सरोज पाटनी जैन के नवीन काव्य संग्रहों का भव्य लोकार्पण

पटना, 15 मार्च 2026। अध्यात्म, अहिंसा और शाकाहार को समर्पित संस्था आशा बिहार द्वारा स्थानीय बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स सभागार, पटना में विदुषी कवयित्री सरोज पाटनी जैन के काव्य संग्रहों का भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर उनकी काव्य-श्रृंखला अहसासों की शृंखला के अंतर्गत प्रकाशित नवीन काव्य संग्रह अहसासों के स्पर्श एवं अहसासों के रतजगे का लोकार्पण किया गया। काव्य संग्रहों का लोकार्पण कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता सिक्कम एवं मेघालय के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, मुख्य अतिथि प्रो. किरण घई सिन्हा, अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच के अध्यक्ष सुजीत मुखर्जी, पद्मश्री विमल जैन, डॉ. अनिल सुलभ, डॉ. शंकर प्रसाद, आईएएस शशांक शेखर, डॉ. प्रो. वीणा अमृत, उषा झा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच के अध्यक्ष सुजीत मुखर्जी की अंग्रेजी काव्य कृति ड्यूड्रोप्स का सरोज पाटनी जैन द्वारा किया गया भावपूर्ण हिंदी रूपांतरण के भी दो पुस्तकों – हर लम्हा कुछ कहता है एवं ओस की पंखुड़ियाँ के रूप में लोकार्पित किया गया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उद्घाटनकर्ता पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि सरोज पाटनी जैन एक बेहतरीन लेखिका हैं और उनकी कविताएं ह्रदय को छूती है। अपने संबोधन में अतिथियों ने सरोज पाटनी जैन की साहित्य साधना, समाज सेवा और नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं में मानवीय संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों और आध्यात्मिक चेतना का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी सरोज पाटनी जैन एक सफल महिला उद्यमी, समाजसेविका, लेखिका, चित्रकार, ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ हैं। वे बिहार महिला उद्योग संघ की संस्थापक सचिव तथा आशा बिहार की राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं और अब तक 7000 से अधिक लोगों को शाकाहारी जीवन अपनाने के लिए प्रेरित कर चुकी हैं। साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें अहिंसा मित्र, दिव्यांग मित्र, अहिंसा अणुव्रत, नारी शक्ति, साहित्य शिल्पी, विदुषी, समीक्षक और सरस का मोती सहित अनेक सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। अब तक उनके 10 काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं तथा पिछले पांच वर्षों में लगभग 2000 कविताएं और कहानियाँ उनकी लेखनी से सृजित हुई हैं। कार्यक्रम का संचालन श्वेता सुरभि ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन स्वयं सरोज पाटनी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, समाजसेवियों एवं साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही और आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

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