बिहार सरकार द्वारा सफ़ाई कर्मियों के साथ छलावा : चंद्र प्रकाश सिंह

पटना 24 जनवरी– बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने बिहार राज्य सफ़ाई कर्मचारी आयोग के गठन की घोषणा कर सफ़ाई कर्मियों को गुमराह करने का काम किया। 29 जुलाई 2025 को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में आयोग के गठन को स्वीकृति दी गई तथा 30 जुलाई 2025 को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई, किंतु इसके बावजूद आज तक आयोग का विधिवत गठन नहीं हो सका है। न तो आयोग के सदस्य नियुक्त हुए हैं और न ही इसका कार्यालय ही खोला गया है।

चंद्र प्रकाश सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, इंटक-सह- बिहार लोकल बॉडीज संयुक्त कर्मचारी संघर्ष मोर्चा ने गहरा खेद व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के गठन को दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सफ़ाई कर्मचारी आयोग को केवल काग़ज़ों तक सीमित रखा गया है। यह बिहार के लाखों सफ़ाई कर्मियों के साथ एक भद्दा मज़ाक है और उनके अधिकारों को जानबूझकर दबाने का कुत्सित प्रयास है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्थानीय निकायों में सफ़ाई कर्मियों के सभी नियमित पदों को समाप्त कर दिया है, जिससे दलित और वंचित समाज से आने वाले सफ़ाई कर्मियों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी के दरवाज़े लगभग बंद हो गए हैं। ऐसे में न तो उन्हें भविष्य में नियमित रोजगार मिलेगा और न ही आरक्षण के संवैधानिक लाभ का अवसर प्राप्त हो सकेगा।

श्री सिंह ने राज्य सरकार से माँग की कि अविलंब बिहार राज्य सफ़ाई कर्मचारी आयोग का विधिवत गठन किया जाए तथा वर्षों से कार्यरत सफ़ाई कर्मियों के सेवा नियमितीकरण की दिशा में तत्काल ठोस कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो राज्यभर के सफ़ाई कामगार व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे और सफ़ाई कार्य ठप करने का भी निर्णय ले सकते हैं, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।

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