पटना, 13 दिसम्बर 2017 :

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा के पहले चरण के दूसरे दिन पूर्वी चंपारण के चकिया प्रखंड, पंचायत महुआंवा के ग्राम बलवा कोठी का भ्रमण कर सात निश्चय एवं अन्य सरकारी योजनाओं के तहत चल रही विकासात्मक कार्यों का जायजा लिया। जनसभा स्थल पर बने हेलीपैड से बलवा कोठी ग्राम पहुँचने पर ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री को माला पहनाकर और ताली बजाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। बलवा गाँव भ्रमण के क्रम में सबसे पहले मुख्यमंत्री ने सामुदायिक भवन के समक्ष वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री ने सात निश्चय योजनान्तर्गत बलवा गाँव के वार्ड संख्या 9 में 1067482 रुपये की लागत से नाली निर्माण, 1097700 की लागत से गली निर्माण, 974574 रुपये की लागत से गली निर्माण की योजनाओं से संबंधित शिलापट्टों का अनावरण किया। मनरेगा के तहत बलवा गाँव के वार्ड संख्या 10 में आंगनबाड़ी भवन केन्द्र निर्माण का भी मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया। बलवा कोठी गॉव भ्रमण के दौरान ग्रामवासियों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की पूरी जानकारी ली। ग्रामीणों से मुलाकात के क्रम में सबसे पहले मुख्यमंत्री ने ग्रामवासी दारोगा पाण्डेय और रामरती देवी से मुलाकात की, जिनसे 2009 की विकास यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार गॉव की समस्याओं से रू-ब-रू हुए थे। बलवा कोठी गाँव की मुखिया श्रीमती सुमित्रा देवी, किसुन सहनी, गगन देव राम जैसे अन्य कई ग्रामीणों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री ने गॉव की वस्तुस्थिति को जाना। बलवा कोठी गाँव भ्रमण के बाद मुख्यमंत्री ने जनसभा स्थल पर बने मंच से विकसित बिहार के सात निश्चय एवं विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा से संबंधित पुस्तिकाओं का विमोचन करने के बाद रिमोट के जरिये 296 करोड़ रुपये की लागत वाली योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले मैं अपना आत्म संतोष प्रकट करना चाहता हूॅ कि 19 जनवरी 2009 में विकास यात्रा का शुभारंभ इसी चंपारण से किया था और उस समय पश्चिमी चंपारण के दो गांव और पूर्वी चंपारण के दो गांव में हम टेंट में रुके थे। विकास यात्रा में मेरा लक्ष्य गांव में ही रुकने का था क्योकि मेरा मानना था कि अगर किसी के घर में रुकेंगे तो उसके लिए बोझ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले की तरह अधिकारी टेंट में रहने की आदत डालें और इस तरह से विकास यात्रा के क्रम में गांव- गांव जाकर टेंट में गॉव वालों के बीच रहकर स्थिति का जायजा लें। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में निश्चय यात्रा की और फिर उसके बाद हमने सोचा कि काम की समीक्षा भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के बहकावे में आकर पंचायतों के मुखिया गुमराह हो गए थे, जिसके कारण विकास के कामों में कुछ दिन व्यवधान उत्पन्न हुआ। मुखिया को लगा कि उनका अधिकार छिन गया लेकिन सात निश्चय योजना को देखेंगे तो गली-नाली निर्माण, हर घर नल का जल की योजना में ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। उन्होंन कहा कि चंपारण गांधी जी के सत्याग्रह की भूमि है, जिनका विचार था सत्ता का विकेंद्रीकरण, हर तरह की सुविधा नागरिकों को मिले, यही विकास का प्रतीक होगा। हमने 4 साल के अंदर हर घर तक नल का जल, नली गली का निर्माण, शौचालय का निर्माण करने का लक्ष्य तय किया और वह सब काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि शौचालय का निर्माण अगर हर घर में हो भी जाए और लोग उसका उपयोग न करें तो इसका फायदा बिल्कुल ही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि राम मनोहर लोहिया जी ने 50 के दशक में ही शौचालय निर्माण को लेकर आवाज बुलंद की थी। उन्होंने ये भी कहा था कि नेहरू का विरोध करना बंद कर देंगे अगर हर घर में शौचालय का निर्माण हो जाए ताकि महिलाओं को जो कष्ट हो रहा है, उससे उनको छुटकारा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सवेरा से पहले और अंधेरा के बाद का इंतजार महिलाओं को शौच के लिए करना पड़ता है, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खुले में शौच से मुक्ति, नल का पानी अगर हर घर में उपलब्ध हो जाए तो 90 प्रतिषत बीमारियों से छुटकारा लोगों को मिल जायेगा। विकसित बिहार की सात निश्चय योजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल के अंत तक हर बसावट में बिजली पहुॅचा दी जायेगी और अगले साल के अंत तक हर घर में बिजली का कनेक्षन जो लोग भी इच्छुक हों, उन्हें दे दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सात निश्चय योजनाओं से मुखिया को निराश या हताश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि मुखिया की ही तरह वार्ड सदस्य भी चुनाव के द्वारा निर्वाचित होते हैं। ऐसे में सात निश्चय योजनाओं में मार्गदर्शन मुखिया का ही होगा। उन्होंने कहा कि 5000 लीटर की क्षमता वाली टंकी के माध्यम से 150 से 160 घरों में नल का पानी उपलब्ध हो जा रहा है, ऐसे में जिन घरों में नल का जल पहुंच रहा है, उन परिवारों के लोग पंचायत के मुखिया की तारीफ करेंगे न की शिकायत, ऐसे में जब पंचायत का चुनाव होगा तो मुखिया के पक्ष में ही लोग वोट करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 में हमने न्याय यात्रा की शुरुआत इसी चंपारण की धरती से की थी और 2009 के विकास यात्रा के क्रम में जिन गांवों में हम गए थे, ऐसे में हमने तय किया कि समीक्षा यात्रा में भी उन गांवों में जरूर जाएंगे। इस सिलसिले में मैंने बलवा कोठी के लोगों से मुलाकात की, जिनसे हमारी मुलाकात 2009 की विकास यात्रा में भी हुई थी। आज बलवा गांव निवासी दारोगा पांडे के यहां जाकर मैंने चूड़ा-तिलकुट का जलपान भी किया और गांव की तमाम स्थिति से रू-ब-रू हुआ, ऐसे में उनलोगों से मिलकर और विकास के कामों को देखकर हमें भीतर से संतोष हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2009 में विकास यात्रा के क्रम में बलवा कोठी के लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र बनाने के लिए आग्रह किया था। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बलवा कोठी गांव में बनाने का आदेश हमने विभागीय अधिकारियों को दे दिया है। उन्होंने कहा कि 8 करोड़ 80 लाख रूपये की लागत से बलवा में पुल का निर्माण भी चल रहा है और ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव को पहुंच पथ ठीक करने का निर्देश भी हमने दे दिया है। 296 करोड़ की लागत वाली योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय विधायक श्री श्याम बाबू यादव की मांग को ध्यान में रखते हुए सेमरा घाट पुल का निर्माण भी कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चंपारण से हमारा काफी लगाव है। बापू ने 1917 में जो चंपारण के किसानों को नीलहो के अत्याचार से अपने सत्याग्रह के जरिए मुक्ति दिलाई, उसको कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 और 11 अप्रैल को पटना में बापू के चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के मौके पर देश भर के गांधीवादी विचारको को बुलाया गया क्योंकि 10 अप्रैल को ही गांधीजी पटना पहुंचे और वहां से मुजफ्फरपुर होते हुए वे चंपारण गए और 1917 का चंपारण सत्याग्रह हुआ। चम्पारण सत्याग्रह ने देश की आजादी की लड़ाई को गति दी, जिसका नतीजा हुआ कि 30 साल के अंदर देश आजाद हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1917 में चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी स्थानीय लोगों की बातें खुद दर्ज करने लगे और उसका इतना व्यापक प्रभाव पड़ा कि अंग्रेजों को कानून तक बदलना पड़ा। इस तरह से चंपारण सत्याग्रह ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को निलहों की प्रताड़ना से मुक्ति दिलाई बल्कि देश को भी जगा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू सर्किट से लेकर विकास का सभी काम हो रहा है लेकिन सिर्फ विकास के कामों से ही समाज नहीं बदलेगा बल्कि इसके लिए जो सामाजिक कुरीतियां हैं, उसे मिटाना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की मांग पर बिहार में शराबबंदी लागू की गई और शराबबंदी के बाद परिवारों का न सिर्फ उत्थान और कल्याण हुआ है बल्कि अब उन्हें बेहतर भोजन भी मयस्सर होने लगा है क्योंकि अपनी कमाई का अधिकांश पैसा जो गरीब और मजदूर तबके के लोग हैं, वह शराब में ही खर्च कर देते थे, ऐसे में महिलाएं भी घरेलू हिंसा का शिकार हुआ करती थीं। उन तमाम चीजों से आज लोगों को शराबबंदी के कारण छुटकारा मिला है। मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि जिस तरह से शराबबंदी से नशामुक्ति की ओर बिहार को ले जाने के लिए 21 जनवरी 2017 को मानव श्रृंखला में चार करोड़ लोगों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई थी, ठीक उसी प्रकार अब शराबबंदी, नशामुक्ति से लेकर दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ एक बार फिर 21 जनवरी 2018 को मानव श्रृंखला बनेगी, जिसमें अधिक से अधिक लोगों को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी ताकि इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जो सशक्त अभियान चल रहा है, उसे बल मिले और लोगों के बीच एक संदेश जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दहेज प्रथा और बाल विवाह के लिए कड़े कानून हैं लेकिन कानून के कड़ाई से पालन के साथ ही लोगों को भी जागरूक होना होगा, तभी इसमें कामयाबी मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी को लेकर कानून का सख्ती से पालन हो रहा है और इसके लिए पुलिस विभाग या मद्य निषेध विभाग के अधिकारी अगर कोताही करते हुए पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी हो रही है। महिलाओं से आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप की मांग पर बिहार में शराबबंदी की गई है, ऐसे में निरंतर आपको सजग रहना होगा ताकि जो दो नंबर के व्यापार करने वाले या जहरीली शराब बनाने वाले लोग हैं, उन पर कार्रवाई की जा सके और लोगों को जहरीली शराब पीने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए लोगों में जागृति लानी होगी कि अगर अवैध कारोबार करने वालों द्वारा बेचे गए शराब को वे लोग पीते हैं तो यह जान के लिए घातक हो सकता है, क्योंकि सड़क पर लिखा होता है कि सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। उन्होंने कहा कि हर हाल में सावधान रहना होगा कि कहीं शराब को छोड़कर लोग दूसरे नशीले पदार्थ का सेवन भी न करने लगें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर गांव में बिजली पहुंच रही है और ऐसे में बिजली के खंभों पर एक बोर्ड लगा रहेगा, जिस पर पुलिस विभाग एवं मद्य निषेध विभाग का एक नंबर होगा, जिस पर अवैध कारोबार करने वाले या शराब बनाने वालों लोगों के खिलाफ उस नंबर के जरिये षिकायत की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि करीब 12 करोड़ की आबादी वाले बिहार में छह करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन हैं। गड़बड़ करने वालों का पता चले तो तत्काल इसकी सूचना टेलीफोन नंबर के जरिए पुलिस विभाग या मद्य निषेध विभाग को दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए पुलिस मुख्यालय में एक आई0जी0 मद्य निषेध के लिए तैनात होंगे जिनके पास थाने में शराबबंदी से संबंधित दर्ज कराई गई सूचना और उस पर की गई कार्रवाई की हर जानकारी रहेगी इसलिए गड़बड़ करने वाला किसी भी सूरत में नहीं बच पायेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का तंत्र हम और अधिक मजबूत बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह के कारण कितनी महिलाएं बीमारियों की शिकार होती हैं। 18 साल से कम उम्र की लड़कियॉ जब गर्भ धारण करती हैं तो उन्हें कई दिक्कतों से जूझना पड़ता है और अगर वह बच भी गइंर् तो बच्चे को कई प्रकार की बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती है। उन्होंने कहा कि 5 साल से कम उम्र के 100 में से 39 बच्चे बौनेपन के शिकार हो रहे हैं, जबकि दुनिया में आदमी की लंबाई बढ़ रही है। बाल विवाह के कारण कई तरह की मानसिक बीमारियों से भी बच्चे ग्रसित हो रहे हैं। ऐसे में 21 वर्ष से कम उम्र के लड़कों की शादी और 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की शादी नहीं होनी चाहिए, यह कानूनन अपराध भी है। उन्होंने कहा कि दहेज लेना भी गैर कानूनी है। पहले दहेज प्रथा संपन्न परिवारों में हुआ करता था लेकिन अब इसका चलन गरीब तबके के परिवारों में भी हो गया है, जिसके कारण बाल विवाह के मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में आपको संकल्प लेना होगा कि जो दहेज लेकर शादी करते हैं, उनके विवाह समारोह में आप शामिल नहीं होंगे और अगर आप ऐसा करते हैं तब दहेज लेने वाला अलग-थलग पड़ जाएगा। मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दुहराया कि 21 जनवरी 2017 की ही तरह 21 जनवरी 2018 को जिसमें अब मात्र 40 दिन बचे हैं, उस दिन एक बार फिर शराबबंदी से लेकर नशामुक्ति दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। पंचायत से लेकर ब्लॉक, सब डिवीजन से लेकर जिला और पूरे प्रदेश में लोग मुख्य सड़कों से लेकर गांव की सड़कों पर एक बार फिर खड़े होंगे। लोगों से आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार मानव श्रृंखला में चार करोड़ लोगों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर एक रिकॉर्ड कायम किया था। इस बार भी सशक्त अभियान को लेकर बनने वाली मानव श्रृंखला में अधिक से अधिक लोग हिस्सेदार बनकर पिछले रिकॉर्ड को न सिर्फ तोड़ेंगे बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी कायम होगा। पूरे देश में एक मजबूत संदेश भी इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जाएगा। जनसभा में मौजूद लोगों को हाथ उठाकर संकल्प दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूर्य के समक्ष हाथ उठाकर आपने संकल्प लिया है, ऐसे में इस संकल्प को भूलिएगा नहीं और 21 जनवरी 2018 को मानव श्रृंखला में हर हाल में शामिल होकर इन सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में अपनी भागीदारी दर्ज कराइएगा। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की तरह दहेज प्रथा के लिए भी सभी धर्मों का साथ मिल रहा है और इससे समाज में प्रेम और सद्भाव का वातावरण कायम होगा, तभी बिहार सही मायने में विकास के पथ पर अग्रसर होगा और एक विकसित बिहार बनेगा। समारोह को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री सह पूर्वी चम्पारण जिले के प्रभारी मंत्री श्री विनोद नारायण झा, पर्यटन मंत्री श्री प्रमोद कुमार, सहकारिता मंत्री श्री राणा रणधीर सिंह, स्थानीय विधायक श्री श्यामबाबू यादव,मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री पी0 के0 ठाकुर ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर विधान पार्षद श्री वीरेंद्र नारायण यादव, विधान पार्षद श्री सतीश कुमार, विधान पार्षद श्री राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव श्री प्रत्यय अमृत,खाध उपभोक्ता संरक्षण विभाग और पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज कुमार, ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग के सचिव श्री अरविंद कुमार चौधरी, ग्रामीण कार्य विभाग के प्रधान सचिव श्री विनय कुमार, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बाला डी0 मुरगुन, तिरहुत प्रक्षेत्र के आयुक्त श्री एच0 आर0 श्रीनिवास, मुख्यमंत्री के ओ0एस0डी0 श्री गोपाल सिंह, पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी श्री रमण कुमार, मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र के आई0जी0 श्री सुनील कुमार, पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक श्री उपेन्द्र शर्मा सहित अन्य कई वरीय अधिकारी, स्थानीय नेतागण व गणमान्य लोग मौजूद थे।
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