इंडिया का “ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला” बनेगा अमरीका के “ह्यूमन राइट्स वाच” की तरह दमदार, संस्था की कार्य योजना और आफिसियल लोगो जारी

मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर ने इसी साल 17 जून को स्थापित नाट फार प्राफिट औरगेनाईजेशन “ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन” का आफिसियल लोगो जारी करते हुये इस साल की अब तक की उपलब्धियां तथा भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला।
संस्था का टैगलाइन है अंग्रेज़ी में “ह्यूमन राइट्स विथ ह्यूमन ड्यूटीज” और हिन्दी में है “मानवाधिकार मानव कर्तव्य के साथ’
श्री दफ्तुआर ने बताया कि इस संस्था की स्थापना उनकी जिन्दगी का सबसे महत्वाकांक्षी सपना है जो हिन्दुस्तानी होने के गौरव को बढ़ाता है क्योंकि इस क्षेत्र की जितनी भी संस्थायें हैं जैसे ह्यूमन राइट्स वाच,एमनेस्टी इंटरनेशनल इत्यादि सभी की सभी विदेशी हैं।
ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की प्रेरणा से बना है।जब वे बिहार के राज्यपाल थे तब उन्होंने इस दिशा में कार्य करने हेतु प्रेरित किया था।
ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला ने अपनी स्थापना के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर के दो डिफकल्ट कार्यों को सफल बनाया।बांग्लादेश की जेल में पिछले 11 साल से बंद बिहार के दरभंगा के सतीश चौधरी को एक महीने में इसी साल 12 सितंबर को कैदमुक्त करवा दिया।गौरतलब है कि इस मामले में सतीश के परिजन उसे बांग्लादेश से कैदमुक्त करवाने हेतु 2012 में बिहार के सीएम नीतीश कुमार से भी मिल चुके थे,लेकिन परिणाम तब ढाक के तीन पात वाले ही रहें।
इसके अलावा अभी 5 दिसंबर को बलिया, यूपी के अनिल कुमार सिंह को भी बांग्लादेश की जेल से आजाद करवाया गया जो पिछले साल जून से बांग्लादेश में कैद था।
नाट फार प्राफिट औरगेनाईजेशन ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला का कार्य क्षेत्र सारी दुनिया(Whole of WORLD)होगा।

मानवाधिकार के अलावा,गरीबों,असहाय की मदद,शिक्षा विशेषकर मानवाधिकार शिक्षा,फ्री मेडिकल हेल्प,पर्यावरण संरक्षण,सांप्रदायिक सौहार्द, महिला सशक्तिकरण इत्यादि जैसे कई क्षेत्र हैं जिसमें वैश्विक स्तर पर कार्य किया जायेगा।
ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से भी तत्काल सहयोग मिल गया है। दिसंबर के शुरू में 80जी सर्टिफिकेट संस्था को मिल गया है। डोनेशन देनेवाले को इनकम टैक्स में 50% में छूट भी मिलेगा।
सरकार और संवैधानिक संस्थाओं से समन्वय स्थापित करके जनहित के कार्य किये जायेंगे।लोगों का भी सहयोग लिया जायेगा ताकि भारत की कोई संस्था विश्व विख्यात बन सके।
फाउंडर डायरेक्टर विशाल रंजन दफ्तुआर ने बताया कि अमरीका की “ह्यूमन राइट्स वाच” की स्थापना 1978 में हुई थी।हमें किसी का नकल नहीं करना है लेकिन अगले कुछ सालों में ‘ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला” को वैश्विक पटल पर स्थापित कर देना है। मूल मंत्र होगा सबसे आगे हिन्दुस्तानी।

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