
पिछले पांच दिनों में इंसेफलाइटिस बुखार की वजह से 19 बच्चों की मौत हो चुकी है।
सिर्फ एसकेएससीएच में इस गर्मी के मौसम में 15 बच्चों की मौत हो चुकी है।
निजी अस्पताल ने आधिकारिक पुष्टि की है 4 बच्चों की मौत हुई है. हालांकि हर साल की तरह प्रशासन मौत के आंकड़ों को दबाने में जुटा हुआ है.
मुजफ्फरपुर : बिहार में एक बार फिर लीची से होने वाली बीमारी इंसेफलाइटिस ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. पिछले पांच दिनों में इंसेफलाइटिस बुखार की वजह से मुजफ्फरपुर में 19 बच्चों की मौत हो चुकी है.
सिर्फ एसकेएससीएच में इस गर्मी के मौसम में 15 बच्चों की मौत हो चुकी है. निजी अस्पताल ने आधिकारिक पुष्टि की है 4 बच्चों की मौत हुई है. हालांकि हर साल की तरह प्रशासन मौत के आंकड़ों को दबाने में जुटा हुआ है.
इंसेफलाइटिस बुखार से पीड़ित बच्चों को एईएस मान कर सिम्टम्स के आधार पर इलाज होता रहा है. साथ ही जिला प्रशासन बच्चों की बीमारी को लेकर कितना गंभीर है इसका अंदाजा आप जिले में जारी होने वाली रिपोर्ट से लगा सकता हैं।
8 जून को जारी आधिकारिक रिपोर्ट पर संबंधित अधिकारी 11 जून तक हस्ताक्षर करते हैं. हो सकता है ये मानवीय भूल हो लेकिन अगर एक अधिकारी को तारीख याद नहीं है ऐसे में कैसे वो मरते बच्चों को बचाने की मॉनिटरिंग करेंगे ये भी बड़ा सवाल है.
आपको बता दें कि पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार अधपकी लीची को भी इसका कारण माना गया है. दरअसल लीची में पाया जाने वाला एक विशेष प्रकार का तत्व इस बुखार का कारण हो सकता है. हर साल कई बच्चे इंसेफलाइटिस की भेंच चढ़ जाते हैं.
भारतीय राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और सीडीसी ने 2013 और 2014 में इस पर शोध किया. रिपोर्ट के अनुसार, “2013 के परीक्षणों में एक विशेष लक्षण पाया गया जो किसी टॉक्सिन की वजह से हो सकता है.” 2014 के परीक्षण के दौरान भी बुखार के पीछे किसी संक्रमण का प्रमाण नहीं मिला. इससे भी किसी टॉक्सिन के संपर्क में आने की संभावना को बल मिला. यही नहीं, बुखार फैलने का दौर प्रायः मुजफ्फरपुर में लीची के उत्पादन के मौसम में आता है
