खगड़िया : डकैतों के साथ मुठभेड़ में पसराहा थानाध्यक्ष शहीद हो गये, एक अपराधी को पुलिस ने मार गिराया

खगड़िया : जिले के परबत्ता के पसराहा थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह डकैतों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गये हैं. वहीं, एक सिपाही भी मुठभेड़ में घायल हो गया है. घायल सिपाही को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. डकैतों के साथ शुक्रवार की देर रात सलारपुर दियारा स्थित दुधैला बहियार में हुई मुठभेड़ में पुलिस ने भी एक अपराधी को मार गिराया है.
जानकारी के मुताबिक, खगड़िया जिले के पसराहा थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस दिनेश मुनि गैंग के अपराधियों को पकड़ने निकली थी. नवगछिया सीमा के मौजमा के पास डकैतों से पुलिस की मुठभेड़ हो गयी. पुलिस की गोली से एक अपराधी मारा गया, जबकि एक अन्य अपराधी के भी जख्मी होने की सूचना है. वहीं, मुठभेड़ में थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह तथा दो पुलिसकर्मियों को भी गोली लगी. पांच गोलियां आशीष के सीने और कमर में लगी. इससे मौके पर ही उनकी मौत हो गयी. उनके साथ गये एक सिपाही को भी कमर के नीचे गोली लगी है, जिसका इलाज भागलपुर अस्पताल में चल रहा है. आशीष कुमार की शहादत से पूरा पुलिस महकमा शोकाकुल हो गया है. घटना की सूचना मिलने पर आरक्षी अधीक्षक सहित भारी संख्या में पुलिस बल दुधैला बहियार पहुंच चुके हैं.

पहले भी आशीष कुमार सिंह को लग चुकी है गोली
ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब आशीष कुमार सिंह को गोली लगी है. पिछले साल जब वह मुफस्सिल थाना प्रभारी थे, तब भी एक मुठभेड़ में उन्हें गोली लगी थी. लेकिन, वह बच गये थे. आशीष कुमार ना केवल जांबाज सिपाही थे, बल्कि एक बेहद संवेदनशील व्यक्ति भी थे. वह समाज के गरीब गुरबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे. उनकी मां कैंसर की बीमारी से पीड़ित थीं. उनका इलाज कराने के लिए आशीष खुद उन्हें लेकर दिल्ली आते-जाते थे।

शहीद थानेदार गोपाल सिंह के बेटे थे आशीष
मूल रूप से सहरसा के रहनेवाले शहीद सब इंस्पेक्टर आशीष कुमार सिंह वर्ष 2009 बैच के सब इंस्पेक्टर थे. वह थानेदार सहरसा जिले के सरोजा निवासी शहीद गोपाल सिंह के पुत्र थे. आशीष कुमार सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे. उनका ननिहाल खगड़िया जिले के चौथम थाना क्षेत्र के लालपुर में है. खगड़िया जिले के पसराहा थानाध्यक्ष के रूप में आशीष कुमार सिंह ने चार सितंबर, 2017 को योगदान दिया था. तत्कालीन थानाध्यक्ष संजीव कुमार के तबादले के बाद उन्हें पसराहा थाने में पदस्थापित किया गया था.

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